Wednesday, February 25, 2026
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आतंकवाद के खिलाफ केंद्र का बड़ा कदम: पहली राष्ट्रीय एंटी-टेरर पॉलिसी ‘प्रहार’ लॉन्च, दिल्ली में बनेगी नई ATS

टेरर-गैंगस्टर नेक्सस, डिजिटल रेडिकलाइजेशन और क्रॉस-बॉर्डर फंडिंग पर सख्त कार्रवाई; 360-डिग्री सुरक्षा फ्रेमवर्क तैयार

Highlights

  • गृह मंत्रालय ने पेश की पहली राष्ट्रीय एंटी-टेरर पॉलिसी ‘प्रहार’
  • राजधानी दिल्ली में नई ATS यूनिट गठित करने की तैयारी
  • डिजिटल रेडिकलाइजेशन और क्रिप्टो फंडिंग पर निगरानी
  • टेरर-गैंगस्टर नेक्सस और नार्को-टेरर सिंडिकेट पर फोकस
  • टेक्निकल और फाइनेंशियल डेटा सेल का गठन
  • राज्यों के लिए यूनिफाइड 360-डिग्री फ्रेमवर्क

विस्तार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त और समन्वित रणनीति के तहत पहली बार एक राष्ट्रीय एंटी-टेरर पॉलिसी तैयार की है। इस नीति का नाम ‘प्रहार’ रखा गया है, जिसे गृह मंत्रालय ने पेश किया है। इस नीति का उद्देश्य आतंकवाद से जुड़ी हिंसक घटनाओं पर त्वरित और कठोर कार्रवाई करना, खुफिया नेटवर्क को मजबूत बनाना और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

दिल्ली में बनेगी नई ATS

‘प्रहार’ नीति के तहत राजधानी दिल्ली की सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के लिए एक नई दिल्ली एंटी-टेरर स्क्वाड (ATS) गठित करने की तैयारी है। वर्तमान में दिल्ली में आतंकवाद से जुड़े मामलों को स्पेशल सेल संभालती है, लेकिन प्रस्तावित ATS को शहरी सुरक्षा के आधुनिक मॉडल के अनुरूप तैयार किया जाएगा। नई यूनिट को विशेष रूप से टेरर-गैंगस्टर नेक्सस पर नकेल कसने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

प्रस्तावित संरचना

सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित दिल्ली एटीएस (एंटी टेरर स्क्वॉड) की संरचना को बहु-स्तरीय और विशेषीकृत बनाया जा रहा है। इसका नेतृत्व एक स्पेशल पुलिस कमिश्नर के हाथों में होगा, जिनके अधीन दो एडिशनल कमिश्नर तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही 3 से 4 डीसीपी स्तर के अधिकारी विभिन्न अहम जिम्मेदारियों को संभालेंगे। एटीएस के भीतर ऑपरेशन, इंटेलिजेंस, साइबर, इन्वेस्टिगेशन और टेक्निकल सपोर्ट के लिए अलग-अलग यूनिट गठित करने की योजना है, ताकि आतंकवाद से जुड़े मामलों पर समन्वित और त्वरित कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा चार एसीपी रैंक के अधिकारियों की पोस्टिंग भी प्रस्तावित है। सूत्रों के अनुसार, स्पेशल सेल के डीसीपी मनीषी चंद्रा को एटीएस में डीसीपी (ऑप्स) की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

डिजिटल और ट्रांसनेशनल खतरे पर फोकस

प्रस्तावित नई एटीएस में आतंकवाद के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए डिजिटल और ट्रांसनेशनल खतरों पर विशेष फोकस रखा जाएगा। इसके तहत टीम में लीगल एक्सपर्ट और फोरेंसिक स्पेशलिस्ट को भी शामिल किया जाएगा, ताकि जांच प्रक्रिया कानूनी रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से सटीक हो। साथ ही एक समर्पित टेक्निकल और फाइनेंशियल डेटा सेल गठित किया जाएगा, जो डिजिटल फुटप्रिंट मॉनिटरिंग, क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन की ट्रैकिंग, अंतरराष्ट्रीय फंडिंग चैनलों की जांच और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली कट्टरपंथी गतिविधियों की निगरानी जैसे संवेदनशील मामलों पर विशेष नजर रखेगा। इस पहल का उद्देश्य आतंकवाद के आधुनिक नेटवर्क को तकनीकी स्तर पर तोड़ना है।

टेरर-गैंगस्टर और नार्को नेटवर्क पर शिकंजा

अधिकारियों के अनुसार, संगठित अपराध सिंडिकेट और वैश्विक आतंकी मॉड्यूल के बीच बढ़ते गठजोड़ ने सुरक्षा ढांचे में बदलाव की आवश्यकता पैदा की है। नई यूनिट जेल से संचालित अपराध नेटवर्क को तोड़ने और तथाकथित “जेल से सड़क” ऑपरेशन चेन को समाप्त करने पर भी काम करेगी। गोल्डी बराड़, लॉरेंस बिश्नोई और हिमांशु भाऊ जैसे नेटवर्क के वित्तीय और ऑपरेशनल तंत्र पर भी नजर रखी जाएगी।

राष्ट्रीय स्तर पर 360-डिग्री फ्रेमवर्क

‘प्रहार’ नीति का उद्देश्य सभी राज्यों को आतंकवाद के खिलाफ एक यूनिफाइड 360-डिग्री फ्रेमवर्क उपलब्ध कराना है।महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में पहले से ATS सक्रिय है, जबकि हरियाणा में भी ऐसी यूनिट गठित की जा रही है। हालिया सुरक्षा घटनाओं के बाद राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक रणनीतिक बदलाव की जरूरत महसूस की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और डिजिटल माध्यमों से फैलते आतंकवाद को देखते हुए ‘प्रहार’ नीति राष्ट्रीय सुरक्षा को नई दिशा दे सकती है।यह नीति तकनीकी रूप से सक्षम, समन्वित और त्वरित कार्रवाई पर आधारित सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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