Friday, February 20, 2026
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भारत में पहली बार छोटी जंगली बिल्लियों पर राष्ट्रीय अध्ययन, झारखंड के जंगलों में 11,817 बिल्लियों की मौजूदगी

WII-NTCA की रिपोर्ट में 18 राज्यों के 57,000+ कैमरा स्थलों का विश्लेषण; जंगल कैट सबसे व्यापक प्रजाति

 Highlights

  • पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर Small Wild Cats पर व्यापक अध्ययन
  • 18 राज्यों के 57,000+ कैमरा ट्रैप स्थलों का विश्लेषण
  • जंगल कैट भारत की सबसे व्यापक छोटी जंगली बिल्ली
  • झारखंड में 11,817 जंगली बिल्लियों की उपस्थिति
  • दलमा अभ्यारण्य में 121 बिल्लियाँ दर्ज
  • 3.48 करोड़ तस्वीरों का विश्लेषण
  • संरक्षण के लिए नई रणनीति की जरूरत

विस्तार

भारत के जंगलों में पाई जाने वाली छोटी जंगली बिल्लियों (Small Wild Cats) पर पहली बार इतने बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय अध्ययन किया गया है। वन्यजीव संस्थान (WII) और राष्ट्रीय टाइगर संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की रिपोर्ट “Status of Small Cats in Tiger Landscapes of India” (जुलाई 2025) में टाइगर गणना 2018 और 2022 के कैमरा ट्रैप डेटा का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन में देश के 18 राज्यों के 57,000 से अधिक कैमरा ट्रैप स्थलों से आंकड़े जुटाए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा वैज्ञानिक डाटा सेट माना जा रहा है।

 जंगल कैट सबसे व्यापक प्रजाति

रिपोर्ट के अनुसार जंगल कैट (Felis chaus) भारत में सबसे अधिक फैली हुई छोटी जंगली बिल्ली है।

  • अनुमानित व्याप्ति: 96,275 वर्ग किमी
  • 95% कॉन्फिडेंस इंटरवल: 90,075–98,100 वर्ग किमी

निवास क्षेत्र

  • सूखे और नम पर्णपाती वन
  • घास के मैदान
  • वेटलैंड
  • कृषि क्षेत्र

राजस्थान के थार मरुस्थल, मध्य प्रदेश के सतपुड़ा, कान्हा और पन्ना टाइगर रिजर्व सहित मध्य भारत के क्षेत्रों में इसकी मजबूत उपस्थिति दर्ज की गई है। हालांकि जंगल कैट मानव गतिविधियों के बीच भी जीवित रह सकती है, लेकिन Rusty-spotted cat जैसी प्रजातियों की संख्या में गिरावट के संकेत मिले हैं।

“3 लाख” की चर्चा पर क्या कहती है रिपोर्ट?

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में देश में छोटी जंगली बिल्लियों की संख्या लगभग 3 लाख बताई गई है। लेकिन WII-NTCA की आधिकारिक रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन “जनसंख्या” नहीं बल्कि  “occupancy” यानी किस क्षेत्र में उनकी मौजूदगी है, इस पर आधारित है। एक अन्य अध्ययन में जंगल कैट का संभावित वितरण क्षेत्र 5,45,280 वर्ग किमी तक बताया गया है।

इकोसिस्टम की ‘सिपाही’

छोटी जंगली बिल्लियाँ पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं:

  • चूहों की आबादी नियंत्रित करती हैं
  • छोटे पक्षी, सरीसृप और कीटों का शिकार
  • कृषि क्षेत्र में फसलों की सुरक्षा

यदि इनकी संख्या में गिरावट आती है तो खाद्य श्रृंखला और जैव विविधता प्रभावित हो सकती है।

बढ़ते खतरे

IUCN रेड लिस्ट में जंगल कैट को “Least Concern” श्रेणी में रखा गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर खतरे बढ़ रहे हैं:

  • आवास विनाश
  • सड़क निर्माण और रोडकिल
  • कृषि विस्तार
  • अवैध शिकार
  • घरेलू बिल्लियों से हाइब्रिडाइजेशन

भारत में इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-2 के तहत कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।

झारखंड में 11,817 जंगली बिल्लियाँ

राष्ट्रीय अध्ययन के साथ झारखंड से भी अहम आंकड़े सामने आए हैं। राज्य के लगभग 20,881 वर्ग किमी वन क्षेत्र में सर्वे के दौरान कुल 11,817 जंगली बिल्लियों की उपस्थिति दर्ज की गई।

श्रेणीवार आंकड़े

  • नर: 3,117
  • मादा: 8,700
  • दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी: 121

झारखंड जंगली बिल्लियों की संख्या के मामले में देश में छठे स्थान पर है।

सर्वे में शामिल प्रमुख संस्थान

  • वन्यजीव संस्थान, देहरादून (WII)
  • इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी (INSA)
  • नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (NCBS)
  • हॉब स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड नेचुरल रिसोर्स (USA)

देशभर में 26,838 कैमरे लगाए गए और लगभग 3.48 करोड़ तस्वीरों का विश्लेषण किया गया।

संरक्षण क्यों जरूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टाइगर लैंडस्केप सुरक्षित रहेंगे, तो छोटी जंगली बिल्लियाँ भी सुरक्षित रहेंगी।

आवश्यक कदम

  • संरक्षित क्षेत्रों को मजबूत करना
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी
  • अवैध व्यापार पर सख्त रोक
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना

प्राकृतिक धरोहर

भारत की स्वदेशी जंगली बिल्लियाँ हमारी जैव विविधता की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
यदि इनके संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो छोटे शिकारी तंत्र का संतुलन बिगड़ सकता है।

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