एक्स पोस्ट में राज्य सरकार पर साधा निशाना, महतो उरांव को जमीन दखल दिलाने की मांग
Highlights
- बाबूलाल मरांडी ने X पर उठाया जमीन मुद्दा
- CNT एक्ट उल्लंघन का लगाया आरोप
- अरगोड़ा में 1.19 एकड़ जमीन विवाद का जिक्र
- प्रशासन पर दखल-दिहानी में विफलता का आरोप
- मुख्यमंत्री व प्रभावशाली लोगों पर कब्ज़े का दावा
- उच्चस्तरीय जांच समिति बनाने की मांग

विस्तार
रांची। झारखंड की राजनीति में एक बार फिर CNT एक्ट और आदिवासी जमीन का मुद्दा गरमा गया है। भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
CNT एक्ट की खुलेआम अवहेलना का आरोप
मरांडी ने लिखा कि राजधानी रांची में खुलेआम CNT एक्ट की अवहेलना हो रही है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासन आदिवासी भूमि की दखल-दिहानी कराने में विफल साबित हो रहा है।
अरगोड़ा जमीन विवाद का जिक्र
उन्होंने अरगोड़ा अंचल के महतो उरांव का मामला उठाते हुए कहा कि उनकी 1.19 एकड़ जमीन पर चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें दखल नहीं मिल सका है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
सत्ताधारी नेताओं व बिल्डरों पर आरोप
मरांडी ने आरोप लगाया कि—
- मुख्यमंत्री
- सत्ताधारी दल के नेता
- बिल्डर
- प्रभावशाली लोग
CNT एक्ट का उल्लंघन कर आदिवासी जमीनों पर अवैध कब्ज़ा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसी जमीनों पर अपार्टमेंट और बैंक्वेट हॉल जैसे निर्माण किए जा रहे हैं।

‘जल, जंगल, जमीन’ नारे पर सवाल
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर ‘जल, जंगल, जमीन’ का नारा दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर दुमका, रांची, रामगढ़, धनबाद और जमशेदपुर तक आदिवासियों की जमीन पर कब्ज़े हो रहे हैं।
व्यापक जांच की मांग
बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार से मांग की कि—
- महतो उरांव को उनकी जमीन पर विधिसम्मत अधिकार दिलाया जाए
- उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए
जमीन कब्ज़ा करने वाले माफिया व प्रभावशाली तत्वों पर कार्रवाई हो
