शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ बाल विकास पर मंथन, 32% बाल विवाह दर पर जताई चिंता
Highlights
- रांची में यूनिसेफ़ की विचार गोष्ठी
- सहभागी संस्थाएं और स्टेकहोल्डर्स हुए शामिल
- बाल विवाह रोकने पर विशेष चर्चा
- राज्य में बाल विवाह दर 32% के आसपास
- कम उम्र में मातृत्व दर भी चिंताजनक
- सरकार के साथ मिलकर सुधार के प्रयास

विस्तार
रांची : यूनिसेफ़ की ओर से सोमवार को रांची में एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें संस्था की सहभागी एजेंसियां, स्टेकहोल्डर्स और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए।
गोष्ठी का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और बाल विकास से जुड़े मुद्दों पर समन्वित प्रयासों को और प्रभावी बनाने को लेकर मंथन करना था।
बाल विवाह पर विशेष फोकस
यूनिसेफ़ झारखंड प्रमुख डॉ. कनिनिका मित्रा ने बताया कि गोष्ठी में विशेष रूप से राज्य में बाल विवाह की स्थिति और इसे पूरी तरह रोकने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि झारखंड में बाल विवाह की स्थिति में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन इसका प्रतिशत अभी भी लगभग 32% के आसपास है, जो चिंता का विषय है।
कम उम्र में मातृत्व भी चुनौती
डॉ. मित्रा ने बताया कि कम आयु में मातृत्व का प्रतिशत भी करीब 10% है, जो स्वास्थ्य और सामाजिक दृष्टि से गंभीर चिंता का कारण है।उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए यूनिसेफ़ राज्य सरकार के साथ मिलकर लगातार काम कर रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि का बयान
कार्यक्रम में यूनिसेफ़ सेवा क्षेत्र की अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख सोलेडाड हेरेरो भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।उन्होंने कहा कि झारखंड में बाल विकास की गति भले थोड़ी धीमी हो, लेकिन अभिभावकों और समुदाय के सहयोग से
- बाल विवाह रोकने
- स्कूल ड्रॉपआउट कम करने
में काफी सफलता मिल रही है।उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से भारत में इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा रहा है।
