रांची में झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने रखा पक्ष, एकतरफा आरोपों और भ्रांतियों पर दी सफाई
Highlights
- झारखंड पुलिस एसोसिएशन की प्रेस वार्ता आयोजित
- एससी/एसटी थाना से जुड़े मामले पर पुलिस का पक्ष सामने
- जमीन विवाद से जुड़ा बताया गया मामला
- आरोपों में कई विरोधाभास होने का दावा
- अधिवक्ताओं पर दबाव और नारेबाजी का आरोप
- कानून के दायरे में काम करने की बात दोहराई

विस्तार
रांची :आज झारखंड पुलिस एसोसिएशन के केंद्रीय कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता का उद्देश्य हाल के दिनों में एससी/एसटी थाना से जुड़े एक मामले को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों और एकतरफा आरोपों के बीच पुलिस का पक्ष स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखना था।
पुलिस ने रखा अपना पक्ष
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए झारखंड पुलिस एसोसिएशन, रांची जिला अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने कहा कि इस मामले में अधिवक्ता पक्ष पहले ही अपनी बात सार्वजनिक कर चुका है। ऐसे में आवश्यक हो गया था कि पुलिस भी तथ्यों के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जमीन विवाद से जुड़ा मामला
उन्होंने बताया कि यह पूरा मामला एक जमीन विवाद से संबंधित है, जिसमें एक आवेदिका द्वारा गाली-गलौज और लज्जा भंग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
हालांकि पुलिस जांच में कई तथ्य विरोधाभासी पाए गए
- आरोपित व्यक्तियों की उम्र संबंधी बयान गलत पाए गए
- पहचान से जुड़े दावे भी जांच में मेल नहीं खाए
- आवेदिका की आरोपितों से मुलाकात तक नहीं हुई थी
जमीन स्वामित्व पर भी सवाल
राहुल कुमार मुर्मू ने कहा कि जिस जमीन पर खेती का दावा किया गया था, वहां जांच के दौरान निर्माण कार्य होता पाया गया।जमीन स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों में भी असंगति सामने आई, जिससे मामला प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होता है।
अधिवक्ताओं पर दबाव बनाने का आरोप
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद कुछ अधिवक्ताओं द्वारा थाना परिसर में
- दबाव बनाने
- नारेबाजी करने
- घेराव करने
जैसे कदम उठाए गए, जो कानून व्यवस्था की दृष्टि से उचित नहीं हैं।
कानून से ऊपर कोई नहीं
झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि पुलिस संविधान और कानून के दायरे में रहकर कार्य करती है और कानून से ऊपर कोई नहीं है।
एसोसिएशन ने बार एसोसिएशन एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं से अपील की कि वे ऐसे तत्वों पर नियंत्रण रखें, जो समाज में भ्रम और तनाव का माहौल बना रहे हैं।
सभी पक्षों को सुनने की अपील
प्रेस वार्ता के माध्यम से पुलिस ने यह संदेश दिया कि किसी भी मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए और तथ्यों के आधार पर ही दोष तय होना चाहिए।
