Friday, February 6, 2026
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बाज़ारों की धड़कन बने अमित अग्रवाल, लोगों के भरोसे का नया चेहरा

धनबाद की गलियों से बाज़ारों तक गूंज रहा नाम, महापौर पद के मजबूत दावेदार के रूप में उभरे अमित अग्रवाल

Highlights 

  • धनबाद के बाजारों में तेज़ी से बढ़ता जनसमर्थन
  • व्यापारी, युवा और महिलाएं खुलकर जता रहे भरोसा
  • झरिया से हीरापुर, बैंक मोड़ से सरायढेला तक सक्रिय जनसंपर्क
  • जाम, सफाई, पार्किंग और सुरक्षा पर स्पष्ट दृष्टिकोण
  • “मजबूत बाजार ही मजबूत शहर की पहचान”—अमित अग्रवाल
  • जनता उन्हें प्रत्याशी नहीं, बदलाव की उम्मीद के रूप में देख रही

विस्तार

धनबाद। धनबाद की राजनीति में इन दिनों एक नाम लगातार सुर्खियों में हैमहापौर प्रत्याशी अमित अग्रवाल। शहर की सुबह चाय की दुकानों से शुरू होकर शाम के व्यस्त बाजारों तक, हर जगह उनके नाम की चर्चा सुनाई दे रही है। व्यापारी हों या आम नागरिक, युवा हों या महिलाएं—हर वर्ग के लोग उनके साथ कदम से कदम मिलाते नजर आ रहे हैं।

बाज़ारों में दिखा जनसमर्थन का उत्साह

झरिया, सिंदरी, डिगवाडीह, कतरास, हीरापुर, बैंक मोड़, पुराना बाजार और सरायढेला—जहां भी अमित अग्रवाल पहुंचते हैं, वहां स्वागत का माहौल बन जाता है। दुकानदार अपने प्रतिष्ठान से बाहर निकलकर उनका अभिनंदन करते हैं, युवा वर्ग सेल्फी लेकर समर्थन जताता है, जबकि महिलाएं खुलकर अपनी समस्याएं और सुझाव उनके सामने रखती हैं।

वादों से आगे, ज़मीनी मुद्दों पर फोकस

अमित अग्रवाल सिर्फ चुनावी भाषणों तक सीमित नहीं हैं। वे बाजारों की जमीनी समस्याओं—

  • जाम और अव्यवस्थित ट्रैफिक
  • सफाई व्यवस्था
  • पार्किंग की कमी
  • स्ट्रीट लाइट
  • सुरक्षा और व्यापारिक सुविधाओं
    पर स्पष्ट और व्यावहारिक दृष्टिकोण रखते हैं।
    उनका मानना है कि “मजबूत बाजार ही मजबूत शहर की पहचान है।”

व्यापारियों की उम्मीद बने अमित अग्रवाल

व्यापारियों का कहना है कि धनबाद को ऐसे महापौर की जरूरत है जो व्यापार को बढ़ावा दे, मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त करे और नगर निगम की व्यवस्था को पारदर्शी बनाए। इसी सोच के कारण बाजारों में उनके समर्थन को लेकर चर्चाएं तेज होती जा रही हैं।

सादगी और सक्रियता बनी पहचान

लोगों के बीच अमित अग्रवाल की सहजता, सादगी और सक्रियता उन्हें एक अलग पहचान दिला रही है। हर मुलाकात में वे लोगों की समस्याएं ध्यान से सुनते हैं, नोट करते हैं और समाधान का भरोसा देते हैं। यही वजह है कि आम जनता उन्हें केवल प्रत्याशी नहीं, बल्कि भरोसे और उम्मीद के प्रतीक के रूप में देख रही है।

क्या बदलेगा धनबाद का नेतृत्व?

धनबाद की सड़कों और बाजारों में अब सवाल नहीं, बल्कि चर्चा है—
क्या इस बार शहर की कमान ऐसे चेहरे को मिलेगी, जो बाजारों की नब्ज समझता है और जनता की आवाज को अपनी ताकत मानता है?
शहर का माहौल बदल रहा है और बदलाव की इस बयार में अमित अग्रवाल का नाम तेजी से उभर रहा है।

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