रांची में आयोजित कार्यशाला में सतत उद्यम विकास पर चर्चा, केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर जोर
Highlights
- रांची में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन
- ग्रामीण विकास विभाग और नीति आयोग का संयुक्त कार्यक्रम
- जनजाति एवं ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण पर मंथन
- उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर
- झारखंडी उत्पादों और व्यंजनों के स्टॉल आकर्षण का केंद्र
- ग्रामीण पलायन रोकने पर चर्चा
विस्तार
रांची : ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार और नीति आयोग, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में “सतत उद्यम विकास के माध्यम से जनजाति एवं ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण” विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन रांची में किया गया।
कार्यशाला में योजना एवं विकास विभाग, झारखंड सरकार के सचिव मुकेश कुमार और नीति आयोग, भारत सरकार के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद्र उपस्थित रहे।
उद्यमिता से ग्रामीण सशक्तिकरण पर चर्चा
कार्यशाला के दौरान उद्यमिता के माध्यम से जनजाति और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यम के अवसर बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकता है।
झारखंडी उत्पादों के स्टॉल
कार्यशाला में उद्यमियों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे।
इन स्टॉलों में
- झारखंडी व्यंजन
- स्थानीय हस्तशिल्प
- घरेलू उत्पाद
- परिधान और पारंपरिक वस्तुएं
प्रदर्शित की गईं।
सचिव मुकेश कुमार का बयान
योजना एवं विकास विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने कहा-“केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। गांवों को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना ही हमारी प्राथमिकता है।”
उन्होंने कहा कि आवश्यकता के अनुसार समाधान उपलब्ध कराकर ही ग्रामीण आजीविका को स्थायी रूप से मजबूत किया जा सकता है।
नीति आयोग का दृष्टिकोण
नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद्र ने कहा कि झारखंड में जनजाति और ग्रामीण सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा “ग्रामीण विकास के लिए मजबूरी में होने वाले पलायन को रोकना जरूरी है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यम के अवसर पैदा करने होंगे।”
ग्रामीण विकास की दिशा में पहल
कार्यशाला में यह भी कहा गया कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में सतत उद्यम मॉडल विकसित किया जाए, तो इससे रोजगार, आय और सामाजिक विकास तीनों को गति मिलेगी।
