मंदिर परिसर और मुखबा गांव में प्रवेश को लेकर सख्त नीति, धार्मिक परंपराओं और मर्यादा का हवाला
Highlights
- गंगोत्री धाम में प्रवेश व्यवस्था को लेकर मंदिर समिति का बड़ा फैसला
- मंदिर परिसर और मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव में लागू होगी नई नीति
- धार्मिक परंपराओं और मंदिर की मर्यादा के आधार पर लिया गया निर्णय
- अन्य धामों में भी प्रवेश नीति बदलने पर चर्चा तेज
- हरिद्वार में भी उठी मांग, राजनीतिक बहस शुरू

विस्तार
गंगोत्री धाम में नई प्रवेश नीति
उत्तरकाशी- उत्तराखंड के प्रसिद्ध गंगोत्री धाम को लेकर श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने प्रवेश व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। मंदिर समिति की हालिया बैठक में मंदिर परिसर और मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव में प्रवेश नियमों को लेकर नई नीति लागू करने का निर्णय लिया गया।
मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि यह कदम धार्मिक परंपराओं, आस्था और मंदिर की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक वातावरण की रक्षा के लिए प्रवेश व्यवस्था को स्पष्ट और सख्त किया जाना जरूरी था।
प्रशासनिक सहयोग और नियमों का पालन
मंदिर समिति ने संकेत दिया है कि नई व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए स्थानीय प्रशासन का सहयोग लिया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं।
अन्य धामों में भी बदलाव की संभावना
गंगोत्री धाम के फैसले के बाद उत्तराखंड के अन्य प्रमुख तीर्थस्थलों में भी प्रवेश व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि भविष्य में अन्य मंदिरों में प्रवेश व्यवस्था से जुड़े प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में कोई भी अंतिम निर्णय बोर्ड की बैठक के बाद ही लिया जाएगा।
हरिद्वार में भी उठी मांग
धार्मिक स्थलों में प्रवेश नियमों को लेकर उत्तराखंड में पहले भी बहस होती रही है। हरिद्वार के हरकी पैड़ी समेत कई स्थानों पर समय-समय पर प्रवेश व्यवस्था को लेकर मांग उठती रही है। कुछ संगठनों ने धार्मिक परंपराओं की रक्षा का हवाला देते हुए पुराने नियमों का उल्लेख किया है, जिनका संबंध ब्रिटिश कालीन बायलॉज से बताया जाता है।
राजनीतिक बहस तेज
गंगोत्री धाम के फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए सरकार से स्पष्ट नीति की मांग की है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि धार्मिक स्थलों में प्रवेश को लेकर कोई भी निर्णय संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।
वहीं मंदिर समिति का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि धार्मिक परंपराओं और मंदिर की मर्यादा को बनाए रखना है।
