मोदी सरकार ने देशभर से प्रेरणादायक व्यक्तित्वों को दी पहचान, 39 हजार से अधिक नामांकनों के बाद हुआ चयन
Highlights
- पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा, कुल 131 पुरस्कार विजेताओं की सूची जारी
- 39,000 से अधिक नामांकनों में से बहुस्तरीय प्रक्रिया के बाद चयन
- 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 84 जिलों से विजेता
- 10 जिलों को स्वतंत्रता के बाद पहली बार पद्म सम्मान
- 48 सुपर सीनियर सिटीजन (80+ आयु) को मिला सम्मान
- दलित, वंचित, जनजातीय और ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोगों को विशेष पहचान
- वी.एस. अच्युतानंदन को पद्म विभूषण, शिबू सोरेन को पद्म भूषण
- विज्ञान, चिकित्सा, कला, खेल, कृषि, रक्षा सहित 100 से अधिक क्षेत्रों को सम्मान
विस्तार
पद्म पुरस्कार 2026 की ऐतिहासिक घोषणा
वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है, जिसमें कुल 131 पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया गया है। यह सूची भारत के हर कोने से आए उन व्यक्तित्वों की है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में असाधारण योगदान दिया है।
मोदी सरकार ने वास्तविक उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों की पहचान करने के लिए व्यापक प्रक्रिया अपनाई। इसके तहत 39,000 से अधिक नामांकन प्राप्त हुए, जिनका मूल्यांकन मंत्रालयों, राज्यों, जिलों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ परामर्श कर किया गया।
भारत के हर कोने से चयन
पद्म पुरस्कार विजेता देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 84 जिलों से हैं। इसमें 10 ऐसे जिले भी शामिल हैं, जिन्हें स्वतंत्रता के बाद पहली बार पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।यह पुरस्कार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अलाप्पुझा, भोजपुर, कछार, दार्जिलिंग, गुवाहाटी, इम्फाल, जूनागढ़, कृष्णा, मोकोकचुंग, नुआपड़ा, पुरबा बर्धमान, श्रीगंगानगर जैसे क्षेत्रों तक पहुंचे हैं।
समाज के हर वर्ग को सम्मान
इस सूची में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हैं—
- 48 सुपर सीनियर सिटीजन (80 वर्ष से अधिक आयु)
- दलित, वंचित और जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि
- ग्रामीण क्षेत्रों से आए सामाजिक कार्यकर्ता
- गुमनाम नायक, जिन्होंने समाज की सेवा में योगदान दिया
यह चयन “सबका साथ, सबका विकास” की भावना का सशक्त उदाहरण है।
राजनीतिक और सामाजिक योगदान की मान्यता
कम्युनिस्ट नेता वी.एस. अच्युतानंदन को पद्म विभूषण और जनजातीय नेता शिबू सोरेन को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
यह मोदी सरकार के द्विदलीय दृष्टिकोण को दर्शाता है। पिछले 12 वर्षों में 18 से अधिक राजनीतिक दलों और 22 राज्यों के नेताओं को पद्म पुरस्कार दिए गए हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों को विशेष पहचान
अष्टलक्ष्मी राज्यों (पूर्वोत्तर भारत) को अभूतपूर्व मान्यता मिली है। पिछले 12 वर्षों में इन राज्यों को मिले पद्म पुरस्कारों में से 40% से अधिक पुरस्कार इसी अवधि में दिए गए हैं। यह स्वदेशी परंपरा, संस्कृति, भाषा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
विज्ञान, चिकित्सा और समाज सेवा में योगदान
पद्म पुरस्कारों में—
- आम जनता की सेवा में जीवन समर्पित करने वाले डॉक्टर
- वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ
- रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा क्षेत्र के अग्रणी
- कलाकार, खिलाड़ी, लेखक और पत्रकार
- किसान, पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता
को सम्मानित किया गया है। 100 से अधिक क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तित्वों को इस वर्ष पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
“जनता के पुरस्कार” की अवधारणा
सरकार ने पद्म पुरस्कारों को “सरकारी पुरस्कार” से “जनता के पुरस्कार” में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हर पुरस्कार विजेता की कहानी संघर्ष, सेवा और समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल है, जो भारत की असली तस्वीर को दर्शाती है।

