Sunday, January 25, 2026
Homeखबर स्तम्भअमेरिका की नई रक्षा नीति से बदलेगा वैश्विक संतुलन, NATO सहयोगियों को...

अमेरिका की नई रक्षा नीति से बदलेगा वैश्विक संतुलन, NATO सहयोगियों को खुद संभालनी होगी सुरक्षा की जिम्मेदारी

पेंटागन की नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव, सहयोगी देशों पर बढ़ेगा सुरक्षा का बोझ

Highlights

  • पेंटागन ने जारी की नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (NDS)
  • NATO और सहयोगी देशों को खुद उठानी होगी सुरक्षा की जिम्मेदारी
  • अमेरिका अब अकेले वैश्विक सुरक्षा का बोझ नहीं उठाएगा
  • रूस, चीन और उत्तर कोरिया को लेकर बदला अमेरिकी दृष्टिकोण
  • ताइवान पर स्पष्ट उल्लेख नहीं, नीति में सूक्ष्म बदलाव
  • यूरोप से अमेरिकी सैन्य निर्भरता घटाने का संकेत
  • कनाडा को ट्रंप की कड़ी चेतावनी, 100% टैरिफ की धमकी

विस्तार

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने शुक्रवार देर रात नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति (National Defense Strategy – NDS) जारी की है, जो अमेरिका की सैन्य और विदेश नीति में बड़े बदलाव का संकेत देती है। इस रणनीति में साफ तौर पर कहा गया है कि नाटो और अन्य सहयोगी देशों को अब अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी, न कि पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर रहना चाहिए।

यह 34 पन्नों का दस्तावेज 2022 के बाद पहली बार जारी किया गया है। सैन्य नीति दस्तावेज होने के बावजूद इसे काफी हद तक राजनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें अमेरिका की प्राथमिकताओं और भाषा में स्पष्ट बदलाव दिखाई देता है।

सहयोगी देशों पर बढ़ेगा सुरक्षा का बोझ

नई रणनीति में यूरोप और एशिया के कई सहयोगी देशों की परोक्ष आलोचना की गई है। दस्तावेज में कहा गया है कि कई देशों ने लंबे समय तक अपनी रक्षा के लिए अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता बनाए रखी है।

अब अमेरिका चाहता है कि—

  • NATO देश अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करें
  • रूस और उत्तर कोरिया जैसे खतरों से निपटने की जिम्मेदारी साझा करें
  • क्षेत्रीय सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाएं

यह संकेत है कि अमेरिका अब वैश्विक सुरक्षा का भार अकेले उठाने के बजाय सहयोगी देशों पर ज्यादा जिम्मेदारी डालने जा रहा है।

चीन को लेकर बदला रुख, ताइवान पर चुप्पी

चीन को लेकर रणनीति में कहा गया है कि अमेरिका का उद्देश्य चीन पर प्रभुत्व जमाना या उसे अपमानित करना नहीं है, बल्कि उसे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर हावी होने से रोकना है। हालांकि, इस बार जारी रणनीतिक दस्तावेज में ताइवान का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जबकि 2022 की नीति में ताइवान की आत्मरक्षा के समर्थन का स्पष्ट उल्लेख था। विशेषज्ञ इसे अमेरिका की नीति में एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव मान रहे हैं।

यूरोप और रूस पर अमेरिका का नया नजरिया

यूरोप के संदर्भ में दस्तावेज में कहा गया है कि रूस नाटो के पूर्वी देशों के लिए खतरा बना रहेगा, लेकिन यूरोपीय देश अपनी पारंपरिक रक्षा की मुख्य जिम्मेदारी खुद संभालने में सक्षम हैं। गौरतलब है कि अमेरिका पहले ही यूक्रेन सीमा के पास नाटो क्षेत्रों से अपने सैनिकों की संख्या घटाने की पुष्टि कर चुका है।

ग्रीनलैंड और पनामा नहर पर रणनीतिक फोकस

नई रणनीति में ग्रीनलैंड और पनामा नहर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अमेरिका की सैन्य और व्यावसायिक पहुंच सुनिश्चित करने की बात कही गई है। यह वैश्विक भू-राजनीति में अमेरिका की नई प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

कनाडा को ट्रंप की चेतावनी, व्यापार युद्ध का संकेत

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर कनाडा को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि कनाडा चीन के साथ कोई व्यापारिक समझौता करता है, तो अमेरिका तुरंत सभी कनाडाई उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देगा। ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कॉर्नी को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा कदम कनाडा के लिए गंभीर आर्थिक और रणनीतिक खतरा साबित हो सकता है।

वैश्विक शक्ति संतुलन पर असर

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका की नई राष्ट्रीय रक्षा रणनीति का आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन पर व्यापक असर पड़ सकता है। यह रणनीति न केवल वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा देगी, बल्कि NATO की भूमिका को भी और मजबूत या पुनर्परिभाषित कर सकती है। इसके साथ ही अमेरिका-चीन संबंधों में प्रतिस्पर्धा और तनाव के नए आयाम सामने आ सकते हैं, जबकि यूरोप की सैन्य नीति में भी बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर, यह रणनीति आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाली एक निर्णायक नीति साबित हो सकती है।

RELATED ARTICLES

Most Popular