Monday, January 26, 2026
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भारत–यूरोपीय संघ संबंधों में नया अध्याय: ऐतिहासिक ट्रेड समझौते की ओर निर्णायक कदम

भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता अंतिम चरण में, वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार संतुलन पर पड़ेगा दूरगामी असर

Highlights

  • भारत–यूरोपीय संघ (EU) के बीच FTA वार्ता अंतिम चरण में
  • यूरोपीय आयोग प्रमुख ने इसे बताया “Mother of All Deals”
  • करीब 2 अरब लोगों का साझा बाजार बनेगा
  • वैश्विक GDP के लगभग 25% हिस्से को कवर करेगा समझौता
  • गणतंत्र दिवस के आसपास EU नेतृत्व की भारत यात्रा से कूटनीतिक संकेत
  • भारतीय निर्यात, निवेश और सप्लाई चेन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

विस्तार

नई दिल्ली/ब्रसेल्स: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आर्थिक रिश्ते एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर औपचारिक घोषणा हो सकती है, जिससे वैश्विक व्यापार जगत की नजरें इस समझौते पर टिकी हुई हैं।

यह संभावित समझौता ऐसे समय में सामने आ रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था चुनौतियों से जूझ रही है और बड़े आर्थिक ब्लॉक आपसी सहयोग को नई दिशा देना चाहते हैं। भारत और यूरोपीय संघ की यह पहल न केवल द्विपक्षीय व्यापार को मजबूती देगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भी नए संतुलन का संकेत मानी जा रही है।

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ की ओर बढ़ता समझौता

विश्व आर्थिक मंच (WEF), दावोस में अपने संबोधन के दौरान यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने भारत के साथ प्रस्तावित एफटीए को लेकर बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि यह समझौता इतना व्यापक और प्रभावशाली होगा कि कुछ लोग इसे “सभी सौदों का सौदा” यानी Mother of All Deals कह रहे हैं।

उनका कहना था कि यूरोप अब दुनिया के साथ व्यापारिक साझेदारी को और गहरा करना चाहता है और भारत इस रणनीति का एक अहम स्तंभ है।

2 अरब लोगों का साझा बाजार

इस संभावित एफटीए की सबसे बड़ी खासियत इसका विशाल दायरा है। समझौते के लागू होने पर भारत और यूरोपीय संघ मिलकर लगभग 2 अरब आबादी वाला साझा बाजार तैयार करेंगे। यह बाजार वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (Global GDP) के करीब 25 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा। इससे दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे, निवेश बढ़ेगा और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।

गणतंत्र दिवस के बहाने कूटनीतिक मजबूती

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के मौके पर यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी को भी इसी बड़े घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।  यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन 25 जनवरी से भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर रहेंगे।

इस दौरान 27 जनवरी को होने वाले 16वें भारत–ईयू शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और रक्षा सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

व्यापार जगत को बड़ी उम्मीद

भारतीय निर्यातकों और उद्योग जगत में इस प्रस्तावित एफटीए को लेकर खासा उत्साह है।  निर्यातकों के संगठन FIEO के महानिदेशक डॉ. अजय सहाय के अनुसार, यह समझौता भारत के सबसे अहम व्यापारिक साझेदारों में से एक के साथ व्यापार को नई रफ्तार देगा और वैश्विक टैरिफ चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होगा।

वहीं गारमेंट और टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ड्यूटी में छूट या ड्यूटी-फ्री एक्सपोर्ट से भारतीय उत्पाद यूरोपीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

वैश्विक स्तर पर भी पड़ेगा असर

भारत–ईयू के बीच होने वाला यह समझौता सिर्फ दो पक्षों तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक व्यापार व्यवस्था, सप्लाई चेन और निवेश के रुझानों पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

यह पहल इस बात का संकेत है कि कैसे दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं आपसी सहयोग से न केवल अपने हित साध सकती हैं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और विकास में भी योगदान दे सकती हैं।

 

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