Monday, January 19, 2026
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रांची में महाकवि घासीराम महली की 167वीं जयंती सह मेला भव्य रूप से संपन्न

महली समाज की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का संकल्प, नागपुरी लोकसंस्कृति की रही खास झलक

Highlights

  • रांची के जगन्नाथपुर, डीपरा मैदान में महाकवि घासीराम महली की 167वीं जयंती सह मेला आयोजित
  • आयोजन महाकवि घासीराम महली केंद्रीय स्मारक समिति एवं महली जनजाति विकास मंच, झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में
  • मुख्य अतिथि के रूप में बंधु तिर्की (पूर्व मंत्री, कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष) और नवीन जयसवाल (विधायक, हटिया) रहे मौजूद
  • महाकवि घासीराम के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ
  • सांस्कृतिक संध्या में नागपुरी लोकगीतसंगीत और नृत्य ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
  • साहित्यकारों, कलाकारों और शिक्षाविदों ने महाकवि के योगदान को किया स्मरण

विस्तार

राजधानी रांची के जगन्नाथपुर स्थित डीपरा मैदान में रविवार को महाकवि घासीराम महली की 167वीं जयंतीसहमेला भव्य एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। यह आयोजन महाकवि घासीराम महली केंद्रीय स्मारक समिति एवं महली जनजाति विकास मंच, झारखंड प्रदेश, रांची के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग, साहित्यप्रेमी और सांस्कृतिक कार्यकर्ता शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत महाकवि घासीराम महली के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई। आयोजन स्थल पर महली समाज की सांस्कृतिक पहचान और साहित्यिक विरासत की स्पष्ट झलक देखने को मिली।

नेताओं ने महाकवि के योगदान को किया नमन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बंधु तिर्की, माननीय पूर्व मंत्री एवं वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष, झारखंड प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने अपने संबोधन में कहा कि महाकवि घासीराम महली आदिवासी साहित्य और लोकसंस्कृति के सशक्त स्तंभ थे। उन्होंने कहा कि महली समाज की भाषा, संस्कृति और साहित्य को संरक्षित करना आज की पीढ़ी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

वहीं, हटिया विधायक नवीन जयसवाल ने कहा कि महाकवि घासीराम महली का जीवन संघर्ष, सृजन और सामाजिक चेतना का प्रतीक है। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।

नागपुरी लोकसंस्कृति की रंगारंग प्रस्तुति

कार्यक्रम की सांस्कृतिक संध्या में नागपुरी लोकसंस्कृति की समृद्ध परंपरा देखने को मिली। प्रसिद्ध नागपुरी लोक कलाकारों ने गीत–संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और लोकगीतों की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

समाज और साहित्य पर केंद्रित विचार

इस अवसर पर महली समाज के वरिष्ठ नेता हरि नारायण राम महली ने अपने वक्तव्य में कहा कि महाकवि घासीराम महली ने समाज को आत्मसम्मान और जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को समझें और आगे बढ़ाएं।
कार्यक्रम में अनेक सम्मानित साहित्यकार, गायक, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में महाकवि घासीराम महली की विरासत को आगे बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

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