गिरिडीह के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में दिल दहला देने वाली घटना, लोन की किस्तों के तनाव में उठाया आत्मघाती कदम
Highlights
- गिरिडीह के गादी श्रीरामपुर गांव की हृदयविदारक घटना
- माँ और नाबालिग बेटी ने घर के अंदर फांसी लगाकर की आत्महत्या
- मृतका पर महिला समूह से करीब 5 लाख रुपये का कर्ज होने की बात सामने आई
- किस्तों के दबाव और लगातार फोन कॉल से मानसिक तनाव में थी माँ
- पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जांच जारी
विस्तार
गिरिडीह जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र अंतर्गत गादी श्रीरामपुर गांव में सोमवार को एक बेहद मार्मिक और हृदयविदारक घटना सामने आई। कर्ज के दबाव और मानसिक तनाव से जूझ रही एक माँ ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से पूरे गांव में शोक और सन्नाटा पसर गया है।
मृतकों की पहचान 40 वर्षीय पुतुल देवी और उनकी 16 वर्षीय बेटी स्नेहा कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, पुतुल देवी ने किसी महिला स्वयं सहायता समूह से करीब 5 लाख रुपये का लोन लिया था, जिसकी जानकारी उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों को नहीं दी थी।
किस्तों का दबाव बना आत्महत्या की वजह
बताया जा रहा है कि लोन की किस्तों को लेकर लगातार फोन कॉल आ रहे थे, जिससे पुतुल देवी मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगी थीं। परिजन बताते हैं कि वह अक्सर चुपचाप रोती रहती थीं, लेकिन पूछने पर भी अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं करती थीं।
सुबह नहीं खुला दरवाजा, फिर हुआ खुलासा
सोमवार सुबह जब काफी देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों को शक हुआ। दरवाजा खोलने पर देखा गया कि माँ और बेटी घर के अंदर फांसी के फंदे से लटकी हुई थीं। आनन-फानन में दोनों को नीचे उतारा गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
पुलिस जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। मौके पर सदर एसडीपीओ जीतवाहन उरांव और मुफ्फसिल थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर श्याम किशोर महतो पुलिस बल के साथ पहुंचे और मामले की जांच शुरू की।
सदर एसडीपीओ ने बताया कि माँ–बेटी द्वारा आत्महत्या किए जाने की सूचना मिली है और पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल भेज दिया गया है।
गांव में शोक का माहौल
इस दर्दनाक घटना के बाद मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे श्रीरामपुर गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग कर्ज के दबाव से टूटते परिवार की इस त्रासदी से स्तब्ध हैं।
