Friday, February 13, 2026
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न्याय सदन में झालसा एक्टिविटी कैलेंडर 2026 और ‘न्याय डगर’ का विमोचन, स्कूली बच्चों को किया गया सम्मानित

झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने विधिक जागरूकता, नशा उन्मूलन और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान को बताया समय की जरूरत

Highlights

  • रांची के डोरंडा स्थित न्याय सदन में कार्यक्रम का आयोजन
  • झालसा एक्टिविटी कैलेंडर 2026 और न्यूज लेटर न्याय डगर का विमोचन
  • स्कूलों में आयोजित वाद-विवाद, निबंध, पेंटिंग, रंगोली प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को सम्मान
  • डायन-बिसाही, नशा मुक्ति, वृद्धजनों और बंदी अधिकारों पर विशेष जोर
  • अंश–अंशिका प्रकरण पर समाज की एकजुटता की सराहना
  • पैरा लीगल वॉलिंटियर्स (PLV) की सक्रिय भूमिका पर टिप्पणी

विस्तार

रांची के डोरंडा स्थित न्याय सदन में आज झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) की ओर से एक गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वर्ष 2026 के लिए झालसा एक्टिविटी कैलेंडर और झालसा के न्यूज लेटर न्याय डगर का विधिवत विमोचन किया गया।

कार्यक्रम में झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद, झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना सहित न्यायिक जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

स्कूली बच्चों को मिला सम्मान

कार्यक्रम के दौरान नशा उन्मूलन, भारतीय संविधान, न्यायिक जागरूकता जैसे विषयों पर आयोजित वाद-विवाद, भाषण, निबंध, पेंटिंग, चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले स्कूली छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र और उपहार देकर सम्मानित किया गया। बच्चों ने न्यायाधीशों के हाथों सम्मान पाकर खुशी जाहिर की और इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।

विधिक जागरूकता पर जोर

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने कहा कि समाज में आज भी डायन-बिसाही जैसी कुरीतियां, नशे की समस्या, वृद्धजनों के अधिकार और बंदी अधिकार जैसे विषय गंभीर चुनौती बने हुए हैं। इन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विधिक जागरूकता और समय पर कानूनी सहायता बेहद आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि नालसा और झालसा के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने का प्रयास लगातार किया जा रहा है और इसके लिए सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

अंशअंशिका प्रकरण पर टिप्पणी

कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने धुर्वा से लापता अंश और अंशिका प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में पैरा लीगल वॉलिंटियर्स (PLV) को और अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी। उन्होंने स्वीकार किया कि पीएलवी के पास संसाधनों की कमी है, लेकिन ऐसे मामलों में उन्हें झालसा या डालसा से संपर्क कर सक्रियता दिखानी चाहिए।

उन्होंने समाज की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि बिना किसी जाति और धर्म के जिस तरह समाज ने एकजुटता दिखाई, वह प्रशंसनीय है। इस तरह की सामूहिक जागरूकता से आपराधिक गिरोहों का मनोबल टूटता है।

न्याय डगर और आगामी गतिविधियां

झालसा की सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना ने भी कार्यक्रम के दौरान अपने विचार साझा किए और कहा कि न्याय डगर और एक्टिविटी कैलेंडर के माध्यम से आने वाले वर्ष में विधिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।

 

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