रांची पुलिस द्वारा ईडी कार्यालय में कार्रवाई के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की रिट याचिका, कानूनी गलियारों में हलचल तेज
Highlights :
- ईडी ने झारखंड हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की
- आज इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई
- मामला राज्य पुलिस बनाम केंद्रीय एजेंसी के अधिकार क्षेत्र के टकराव का
- रांची पुलिस ने पेयजल विभाग के कर्मी की शिकायत पर ईडी कार्यालय में की थी छापेमारी
- कानूनी विशेषज्ञों की नजरें आज की सुनवाई पर
- मामला तेज़ी से राजनीतिक और कानूनी रंग ले रहा है
विस्तार
रांची। झारखंड में ईडी और राज्य पुलिस के बीच उत्पन्न विवाद अब सीधे झारखंड हाई कोर्ट पहुँच गया है। रांची पुलिस द्वारा एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी कार्यालय में की गई जांच/छापेमारी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने रिट याचिका दाखिल की है। हाई कोर्ट में इस मामले की आज ही सुनवाई होनी है, जिसे लेकर कानूनी और राजनीतिक हलकों में तीखी चर्चा जारी है।
क्या है पूरा मामला?
12 जनवरी को पेयजल विभाग के कर्मचारी संतोष कुमार ने आरोप लगाया था कि पूछताछ के दौरान ईडी अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की। इसी शिकायत पर रांची पुलिस ने एयरपोर्ट थाना में मामला दर्ज किया और जांच करने सीधे ईडी कार्यालय पहुंच गई।
इस कार्रवाई के बाद से:
- राजनीतिक विवाद तेज हुआ
- ईडी ने इसे अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण बताया
- राज्य पुलिस पर “अति उत्साह” दिखाने का आरोप लगा
ईडी ने इस पूरी कार्रवाई को “कानून के खिलाफ” बताते हुए झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी है।
क़ानूनी गलियारों में क्यों मची हलचल?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला इसलिए बड़ा है क्योंकि:
- पहली बार किसी राज्य की पुलिस ने सीधे केंद्रीय जांच एजेंसी (ED) के दफ्तर में कार्रवाई की
- यह “एजेंसी बनाम पुलिस” के टकराव का मामला बन गया है
- अधिकार क्षेत्र, प्रक्रियाओं और शक्तियों को लेकर कई कानूनी पेचीदगियाँ सामने आ रही हैं
कई वरिष्ठ अधिवक्ता इस केस को “अप्रत्याशित और संवैधानिक रूप से जटिल” बता रहे हैं।
आज की सुनवाई पर सबकी नजर
झारखंड हाई कोर्ट आज ईडी की याचिका पर सुनवाई करेगा। अदालत यह देखेगी कि—
- क्या रांची पुलिस की कार्रवाई कानूनी थी?
- क्या ईडी को विशेष अधिकार प्राप्त हैं जिनका उल्लंघन हुआ?
- क्या मारपीट के आरोप की जांच पुलिस कर सकती है?
कानूनी समुदाय के अनुसार आज की सुनवाई में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ आ सकती हैं जो भविष्य में एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करेंगी।
झारखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने कहा
यह मामला महज एक FIR का नहीं, बल्कि केंद्रीय एजेंसी और राज्य पुलिस के अधिकारों की सीमा तय करने वाला है। हाई कोर्ट क्या करता है, उस पर पूरे देश की नजर होगी।”
