संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने, पारदर्शिता बढ़ाने और वैश्विक चुनौतियों पर संयुक्त रणनीति पर हो रही महत्वपूर्ण चर्चा
Highlights :
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संसद भवन में सम्मेलन के तीसरे दिन पहुँचे
- कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स का 28वाँ सम्मेलन
- लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने पर फोकस
- संसदीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और तकनीकी उपयोग पर चर्चा
- कई देशों के स्पीकर, उपाध्यक्ष और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भागीदारी
विस्तार
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बुधवार को कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स के 28वें सम्मेलन, 2026 के तीसरे दिन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए संसद भवन पहुँचे।
यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर संसदीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करने और सदस्य देशों के बीच संसदीय अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।
सम्मेलन का महत्व
कॉमनवेल्थ संसदीय समुदाय के लिए यह सम्मेलन कई मायनों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ—
- लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने
- संसदीय परंपराओं को सुरक्षित रखने
- सदस्य देशों के बीच संवाद बढ़ाने
पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श किया जाता है।
इस मंच पर दुनिया भर के कॉमनवेल्थ देशों के संसद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हैं, जो अपने अनुभव साझा करते हुए सुधारों पर सलाह देते हैं।
तीसरे दिन का प्रमुख एजेंडा
सम्मेलन के तीसरे दिन निम्न मुद्दों पर गहन चर्चा की गई:
1. संसदीय लोकतंत्र को सशक्त बनाने की रणनीति
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मजबूत संसद ही मजबूत राष्ट्र का आधार है। उन्होंने विधायी प्रक्रियाओं में जनता की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
2. विधायी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता
टेक्नोलॉजी के उपयोग से संसद की पारदर्शिता और कार्यशैली को और बेहतरीन बनाने पर सभी सदस्य देशों ने सहमति जताई।
3. संसद में तकनीक का बढ़ता उपयोग
- ई-विदान परियोजना
- डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन
- ऑनलाइन प्रश्नोत्तर
- वर्चुअल मीटिंग्स
जैसे आधुनिक बदलावों को आदर्श मॉडल के रूप में पेश किया गया।
4. वैश्विक चुनौतियों पर संयुक्त संसदीय दृष्टिकोण
जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, आर्थिक असुरक्षा और महामारी जैसी अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर साझा रणनीति बनाने के लिए चर्चाएँ हुईं।
संसद भवन में आयोजित यह सम्मेलन भारत की वैश्विक लोकतांत्रिक नेतृत्व भूमिका को और मजबूत करता है। ओम बिरला की सक्रिय भागीदारी ने भारतीय संसद की आधुनिक और पारदर्शी कार्यशैली को दुनिया के सामने और मजबूती से प्रस्तुत किया है।
