पेसा कानून को लेकर भाजपा का आक्रामक रुख, जनता की अदालत में जाने की चेतावनी
Highlights:
- रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में बाबूलाल मरांडी का संवाददाता सम्मेलन
- पेसा कानून 1996 में बदलाव को लेकर हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप
- आदिवासी रूढ़िजन्य परंपराओं से छेड़छाड़ का दावा
- ग्राम सभा में बैकडोर एंट्री का लगाया आरोप
- कांग्रेस पर भी साधा निशाना, कहा— अपने ही कानून का कर रही समर्थन में विरोधाभास
राजधानी रांची स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला। इस दौरान भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता भी मौजूद रहे। संवाददाता सम्मेलन का मुख्य विषय झारखंड में लागू किए गए पंचायती उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 यानी पेसा कानून में कथित छेड़छाड़ रहा।
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार ने पेसा कानून के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ कर आदिवासियों की रूढ़िजन्य परंपराओं और सामाजिक रीतियों को कमजोर करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने आदिवासी परंपराएं छोड़ दी हैं, उन्हें बैकडोर से ग्राम सभा में शामिल कर लाभ पहुंचाने की साजिश रची जा रही है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला इतना गंभीर है कि भाजपा इसे “जनता की अदालत” में लेकर जाएगी। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 1996 में केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी, और पेसा कानून कांग्रेस की ही देन है। इसके बावजूद आज कांग्रेस झारखंड में मूल कानून में बदलाव कर लागू किए गए इस विवादित बिल का समर्थन कर रही है, जो पूरी तरह विरोधाभासी है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार आदिवासी हितों की बात तो करती है, लेकिन वास्तविकता में उसके फैसले आदिवासी समाज की परंपराओं और स्वशासन की भावना के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
