श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर के जीर्णोद्धार से सकारात्मक ऊर्जा, औद्योगिक गतिविधियों के पुनः आरंभ की जगी उम्मीद
Highlights:
- जमशेदपुर के केबुल टाउन स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर का तेज़ी से हो रहा जीर्णोद्धार
- देवी-देवताओं की स्थापना और नियमित पूजा से बदला वातावरण
- वर्षों से बंद केबुल कंपनी के फिर से चालू होने के प्रबल संकेत
- मंदिर में दशावतार और चार महर्षियों की अनूठी स्थापना
- सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर बाउंड्री, गोपुरम और फर्श निर्माण कार्य जारी
विस्तार
मंदिर पुनरुद्धार से लौट रही सकारात्मक ऊर्जा
जमशेदपुर के केबुल टाउन स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर (पूर्ववर्ती बिड़ला मंदिर) का जीर्णोद्धार कार्य जैसे-जैसे तेज़ी पकड़ रहा है, वैसे-वैसे क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। लंबे समय से उपेक्षित रहे इस पवित्र स्थल के पुनर्जीवन के साथ ही केबुल कंपनी में औद्योगिक गतिविधियों के दोबारा शुरू होने की उम्मीद भी मजबूत होती जा रही है।
देवी-देवताओं की स्थापना के बाद बदला माहौल
मंदिर परिसर में श्रीलक्ष्मीनारायण, माँ काली, भगवान शिव, प्रथम पूज्य श्री गणेश और पवनपुत्र हनुमान जी के विग्रह स्थापित होने और नियमित पूजा-अर्चना शुरू होने के बाद वातावरण में सकारात्मकता का संचार हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि वर्षों से मंदिर परिसर में डेरा जमाए बैठी नकारात्मक शक्तियाँ अब समाप्त हो चुकी हैं।
बाधाएँ दूर, केबुल कंपनी के पुनः संचालन की उम्मीद
मंदिर जीर्णोद्धार में आ रही बाधाएँ दूर होने के साथ-साथ अब केबुल कंपनी के फिर से चालू होने के आसार भी प्रबल हो गए हैं। स्थानीय लोगों और हितधारकों को उम्मीद है कि धार्मिक और औद्योगिक गतिविधियों का यह संगम क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा।
विशेष पूजा-अनुष्ठान की संभावना
मंदिर परिसर में विराजमान देवी-देवताओं से विशेष प्रार्थना की गई है कि जिस प्रकार मंदिर जीर्णोद्धार में आ रही अड़चनें दूर हुईं, उसी तरह केबुल कंपनी के पुनः खुलने के मार्ग में आने वाली सभी बाधाएँ भी समाप्त हों। आवश्यकता पड़ने पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए जाने की संभावना भी जताई गई है।
देश का अनूठा लक्ष्मीनारायण मंदिर
श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर में भगवान विष्णु के दशावतारों के विग्रहों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जिनका रंग-रोगन कार्य शेष है। इसके साथ ही गर्भगृह के चारों कोनों में सनातन संस्कृति के चार महान महर्षियों—
- महर्षि विश्वामित्र
- महर्षि जमदग्नि
- महर्षि कश्यप
- महर्षि वाल्मीकि
की प्रतिमाएँ भी स्थापित की जा चुकी हैं। संभवतः यह देश का पहला लक्ष्मीनारायण मंदिर होगा, जहाँ भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी के साथ दशावतार और चार महर्षि एक साथ विराजमान हैं।
सुरक्षा और सुविधा पर विशेष ध्यान
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर की बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। वहीं, भव्य गोपुरम (प्रवेश द्वार) की मरम्मत और उसके शिखर पर पीतल के पाँच कलशों की स्थापना का कार्य भी जारी है। इसके बाद गर्भगृह के सामने विशाल फर्श का निर्माण किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन में और अधिक सुविधा मिलेगी।
केबुल टाउन में लौटेगी पुरानी रौनक
विश्वास जताया जा रहा है कि श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में विराजमान देवी-देवताओं की कृपा और आशीर्वाद से न केवल मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण होगा, बल्कि केबुल कंपनी में आर्थिक गतिविधियाँ भी पुनः शुरू होंगी। इससे केबुल टाउन क्षेत्र एक बार फिर गुलज़ार होगा और अपनी पुरानी पहचान हासिल करेगा।
