रांची में आदिवासी बचाओ मोर्चा समेत कई संगठनों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस, हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप
Highlights:
- रांची के धूमकुडीया भवन में आदिवासी संगठनों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस
- पेसा नियमावली 2025 को बताया पेसा एक्ट 1996 की मूल भावना के खिलाफ
- ग्राम सभा की शक्तियां कमजोर करने का आरोप
- झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 के तहत नियमावली बनाने पर सवाल
- राज्य नियंत्रण बढ़ाने और आदिवासी स्वशासन खत्म करने का दावा
- नियमावली को तत्काल वापस लेने की मांग
विस्तार
धूमकुडीया भवन में जुटे आदिवासी संगठन
राजधानी रांची के धूमकुडीया भवन में रविवार को आदिवासी बचाओ मोर्चा एवं अन्य आदिवासी संगठनों की ओर से एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड सरकार द्वारा दिसंबर 2025 में कैबिनेट से मंजूर की गई पेसा नियमावली 2025 को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।
पेसा एक्ट 1996 की भावना से खिलवाड़ का आरोप
सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पेसा नियमावली 2025, पेसा एक्ट 1996 की मूल भावना और संवैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। यह नियमावली आदिवासी क्षेत्रों में स्वशासन को मजबूत करने के बजाय राज्य के नियंत्रण को बढ़ावा देती है।
ग्राम सभा की शक्तियां कमजोर करने का दावा
आदिवासी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस नियमावली के माध्यम से ग्राम सभाओं की संवैधानिक शक्तियों को कमजोर किया जा रहा है, जिससे आदिवासी समाज की पारंपरिक निर्णय प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ेगा। उनका कहना था कि पेसा कानून का मूल उद्देश्य ग्राम सभा को सर्वोच्च संस्था बनाना है, लेकिन नई नियमावली इसे कमजोर करती है।
कानूनी उल्लंघन का भी लगाया आरोप
वक्ताओं ने कहा कि पेसा एक्ट यह स्पष्ट करता है कि नियम परंपरागत कानूनों और रीति-रिवाजों के अनुरूप बनाए जाने चाहिए। जबकि झारखंड सरकार ने पेसा नियमावली को झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 की धारा 131 के तहत बनाया है, जो कि पेसा एक्ट की धारा 4 (एन) का खुला उल्लंघन है।
राज्य सरकार के हस्तक्षेप की आशंका
आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी कि इस नियमावली के लागू होने से उच्च पंचायत संस्थाएं और राज्य सरकार ग्राम सभाओं पर हावी हो जाएंगी, जिससे आदिवासी स्वशासन और संवैधानिक अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे।
नियमावली वापस लेने की मांग
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित संगठनों ने एक स्वर में पेसा नियमावली 2025 को तत्काल वापस लेने, ग्राम सभा को केंद्र में रखकर नई नियमावली बनाने और आदिवासी समाज से व्यापक परामर्श की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
