पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने आदिवासी अधिकार, जमीन अधिग्रहण, पेसा और घुसपैठ को लेकर सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
Highlights:
- चंपाई सोरेन का दावा: 5 माह का कार्यकाल, सरकार के 6 साल पर भारी
- 2026 को बताया आदिवासी-मूलवासी जनआंदोलन का वर्ष
- हिंडालको को शिड्यूल एरिया में जमीन देने पर उठाए सवाल
- पेसा नियमावली को “छुपाकर लाने” का आरोप
- बांग्लादेशी घुसपैठ और धर्मांतरण पर चिंता जताई
विस्तार :
“मैं इंटरवल का हीरो था” चंपाई सोरेन
रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने वर्तमान राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “मैं तो इंटरवल का हीरो था। पांच महीने के लिए मुख्यमंत्री बना, लेकिन मेरा यह पांच माह का कार्यकाल वर्तमान सरकार के छह साल पर भारी पड़ेगा।” उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्ष 2026 जनआंदोलन का साल होगा, जब आदिवासी और मूलवासी अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरेंगे।
“2025 में आदिवासियों पर अत्याचार” का आरोप
चंपाई सोरेन ने कहा कि “2025 में अबुआ सरकार के कार्यकाल में आदिवासियों पर अत्याचार हुआ है। उनकी जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है, धर्मांतरण हो रहा है।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे स्वयं छह साल की सरकार का हिस्सा रहे, लेकिन उनके प्रयासों के बावजूद कई मुद्दों का समाधान नहीं हो सका।
हिंडालको को जमीन देने पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि “सरकार ने हिंडालको को 800 एकड़ से ज्यादा जमीन दी है, जबकि यह जमीन आदिवासियों की है। शिड्यूल एरिया में इस तरह की जमीन देने की क्या जरूरत थी?” उन्होंने कहा कि इस जमीन अधिग्रहण में ग्राम सभा की अनुमति नहीं ली गई, जो कानून और आदिवासी परंपराओं के खिलाफ है।
वन, आजीविका और सामाजिक व्यवस्था पर संकट
चंपाई सोरेन ने कहा कि वनरोपण और औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों की जमीन ली जा रही है, जिससे
- जंगल पर निर्भर सामाजिक व्यवस्थाएं टूट रही हैं
- लोगों की आजीविका छिन रही है
- “नो एंट्री” क्षेत्रों में लाठीचार्ज तक किया जा रहा है
उन्होंने सवाल उठाया—“जिनका जीवन जंगल से चलता है, वे आखिर जाएंगे कहां?”
घुसपैठ और खनन पर भी चिंता
चंपाई सोरेन ने बांग्लादेशी घुसपैठ को सामाजिक व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी-मूलवासी हाशिए पर जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि
- नॉन-शिड्यूल एरिया में धड़ल्ले से खनन हो रहा है
- शिड्यूल एरिया में जमीन पर कब्जा बढ़ रहा है
पेसा को लेकर गंभीर आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा क “पेसा नियमावली को छुपाकर लाया गया है। विभागीय खबरें आ रही हैं कि वहां भी त्रिस्तरीय चुनाव कराए जाएंगे।” उन्होंने इसे पेसा की मूल भावना के खिलाफ बताया और कहा कि अगर इसे सही तरीके से लागू नहीं किया गया, तो आंदोलन तय है।
