Friday, March 6, 2026
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पेसा नियमावली को मंजूरी पर राज्यभर में उत्सव, मुख्यमंत्री आवास में पारंपरिक अंदाज में जताया गया आभार

राज्य मंत्रिपरिषद से मंजूरी के बाद पेसा नियमावली के धरातल पर उतरने की तैयारी, सीएम हेमंत सोरेन ने नगाड़ा बजाकर जाहिर की खुशी

Highlights:

  • पेसा नियमावली को राज्य मंत्रिपरिषद से मिली मंजूरी
  • मुख्यमंत्री आवास में जनजातीय प्रतिनिधियों ने जताया आभार
  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नगाड़ा बजाकर खुशी का इजहार किया
  • पेसा दिवस के अवसर पर आयोजन को मिला विशेष महत्व
  • पंचायतों को मिले अधिकारों के ईमानदार क्रियान्वयन पर सीएम का जोर
  • मंत्री, विधायक, अधिकारी और ग्राम प्रधान बड़ी संख्या में रहे मौजूद

विस्तार :

पेसा नियमावली पर ऐतिहासिक कदम

पेसा नियमावली को राज्य मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद पूरे झारखंड में जश्न का माहौल है। इस ऐतिहासिक फैसले को लेकर अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को राज्य के विभिन्न जनजातीय इलाकों से आए पारंपरिक प्रधान, प्रमुख, मुखिया और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री आवासीय परिसर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर उनका आभार जताया।

मुख्यमंत्री ने नगाड़ा बजाकर जताई खुशी

इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पारंपरिक नगाड़ा बजाकर अपनी खुशी का इजहार किया। यह दृश्य जनजातीय संस्कृति और पेसा कानून की आत्मा को दर्शाता नजर आया। मुख्यमंत्री के इस कदम ने कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण नेतृत्व में नया उत्साह भर दिया।

पेसा दिवस पर विशेष आयोजन

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन और भी खास है क्योंकि इस अवसर पर पेसा दिवस भी मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पेसा नियमावली को अंतिम मुकाम तक पहुंचाने का जो संकल्प लिया था, वह अब साकार हो रहा है। पेसा कानून अब धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

क्रियान्वयन पर मुख्यमंत्री का जोर

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए नियम-कानूनों में आमतौर पर कोई विसंगति नहीं होती, लेकिन कई बार उनके क्रियान्वयन में गड़बड़ी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पेसा नियमावली के तहत पंचायतों को जो अधिकार प्राप्त होंगे, उनका ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ पालन होना चाहिए। तभी यह कानून अपने उद्देश्य में सफल होगा।

जनजातीय स्वशासन की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि पेसा कानून का असली उद्देश्य ग्राम सभाओं और पंचायतों को सशक्त बनाना है, ताकि जनजातीय समाज अपने संसाधनों, परंपराओं और विकास से जुड़े फैसले स्वयं ले सके। यह कानून आदिवासी समाज के आत्मसम्मान और स्वशासन की भावना को मजबूती देता है।

कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद

इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय, विधायक कल्पना सोरेन, पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार, पंचायती राज निदेशक राजेश्वरी बी सहित राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से आए ग्राम प्रधान, प्रमुख, मुखिया और पेसा मोबिलाइजर्स उपस्थित रहे।

जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनजातीय प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे और पेसा नियमावली को मंजूरी देने के लिए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री का आभार जताया।

 

आदिवासी अधिकारों को मिलेगा नया बल

पेसा नियमावली की मंजूरी को आदिवासी अधिकारों के संरक्षण और सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे ग्राम सभाओं की भूमिका मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में जनभागीदारी को नई ताकत मिलेगी।

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