जेएमएम केंद्रीय महासचिव ने कहा— पेसा सिर्फ कानून नहीं, आदिवासी समाज की संस्कृति, जीवनशैली और आत्मसम्मान का प्रतीक
Highlights:
- रांची स्थित जेएमएम केंद्रीय कैंप कार्यालय में प्रेस वार्ता
• प्रभु यीशु के जन्म से पहले कैबिनेट से पेसा को मिली मंजूरी
• सुप्रियो भट्टाचार्य ने भाजपा और केंद्र सरकार पर साधा निशाना
• बोले— पेसा धरती, जल और मातृशक्ति की वंदना
• ग्रामसभा को मिला निर्णायक अधिकार, गांव तय करेगा विकास की दिशा
विस्तार:
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने रांची स्थित पार्टी के केंद्रीय कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्र की भाजपा सरकार और राज्य भाजपा नेतृत्व पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु के जन्म से ठीक 24 घंटे पहले झारखंड सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पेसा कानून को कैबिनेट की मंजूरी दी। यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की जीवनशैली, संस्कृति और लोकतांत्रिक आत्मा का सम्मान है।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा, “पेसा केवल कानून नहीं है, यह धरती की वंदना है, जल की वंदना है और मातृशक्ति की वंदना है।” उन्होंने दावा किया कि मानव इतिहास की पहली लोकतांत्रिक व्यवस्था आदिवासी समाज ने स्थापित की, जहां समुदाय, प्रकृति और सहभागिता को सर्वोच्च स्थान दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संख्या बल के आधार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है और पेसा कानून उसी राजनीति का सबसे मजबूत जवाब है।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि 1996 में बने पेसा कानून को वर्षों तक जानबूझकर लागू नहीं किया गया। उन्होंने झारखंड भाजपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्रियों पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए भी आदिवासी अधिकारों की अनदेखी की गई।
उन्होंने कहा, “अर्जुन मुंडा सांसद और मुख्यमंत्री रहे, रघुवर दास की पांच साल की सरकार रही, लेकिन आदिवासी अस्तित्व पर हमला ही हुआ। जब हेमंत सोरेन की सरकार आई, तब एक साल में पेसा लागू कर दिखाया।”
केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों में भूमि अधिग्रहण से ग्रामसभा की अनिवार्यता हटाकर आदिवासी समाज को कमजोर करने की कोशिश की गई, जबकि हेमंत सरकार ने ग्रामसभा को लोकतंत्र का मूल केंद्र मानते हुए उसे वैधानिक अधिकार दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब झारखंड में गांव की इजाजत के बिना कोई फैसला नहीं होगा। शिक्षा, रोजगार और विकास की दिशा ग्रामसभा तय करेगी। “हमने समाज को ताकत दी है, अब विकास का रास्ता समाज खुद चुनेगा,” उन्होंने कहा।
