पीआईबी रांची द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में नशा मुक्ति को लेकर सरकार, कानून और समाज की साझा जिम्मेदारी पर हुआ मंथन
Highlights:
• रामगढ़ में ग्रामीण पत्रकारों के लिए ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम आयोजित
• विषय – विकसित भारत के संदर्भ में नशा मुक्ति का महत्व
• पीआईबी रांची ने नशा विरोधी अभियानों की जानकारी दी
• एनसीबी अधिकारियों ने कानून, कार्रवाई और मानस पोर्टल की जानकारी दी
• युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को बताया गंभीर चुनौती
• पत्रकारों से नशा मुक्ति अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील
विस्तार :
रामगढ़ में ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम का आयोजन
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत पत्र सूचना कार्यालय (PIB), रांची द्वारा मंगलवार 23 दिसंबर 2025 को रामगढ़ के होटल ‘शिवम इन’ के कॉन्फ्रेंस हॉल में ग्रामीण क्षेत्रों के पत्रकारों के लिए ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था – “विकसित भारत के संदर्भ में नशा मुक्ति का महत्व”
नशा मुक्त समाज के बिना विकसित भारत संभव नहीं: राजेश सिन्हा
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में स्वागत एवं विषय प्रवेश संबोधन करते हुए पीआईबी रांची के कार्यालय प्रमुख श्री राजेश सिन्हा ने भारत सरकार द्वारा संचालित नशा विरोधी अभियानों और योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत मिशन का सपना तभी साकार हो सकता है, जब समाज का प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवा पीढ़ी, नशे से दूर रहे। उन्होंने पारिवारिक माहौल, सामाजिक मूल्यों और नैतिकता की सही समझ को नशा मुक्त समाज की नींव बताया और पत्रकारों से इन संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की।
युवाओं में नशे की प्रवृत्ति गंभीर चुनौती: एनसीबी
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), रांची इकाई के सहायक निदेशक श्री राणा प्रताप यादव ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति एक गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा नियंत्रण कानूनों का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास के माध्यम से समाज को स्वस्थ दिशा देना है। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति अभियान में समाज और समुदाय की सहभागिता बेहद जरूरी है, केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं।
झारखंड में अवैध नशीली खेती पर सख्त कार्रवाई
एनसीबी रांची इकाई के अधीक्षक श्री शारिक उमर ने झारखंड में नशा नियंत्रण की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राज्य में अवैध नशीली फसलों के खिलाफ लगातार प्रभावी अभियान चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार गांजा जैसी अवैध फसलों को बड़े पैमाने पर नष्ट किया गया है। उन्होंने एनडीपीएस अधिनियम की धारा 46 और 47 की जानकारी देते हुए बताया कि आम नागरिक मानस पोर्टल के माध्यम से अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए नशीले पदार्थों से संबंधित सूचनाएं साझा कर सकते हैं। साथ ही, भारत सरकार द्वारा संचालित टोल-फ्री नंबर 1933 की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।
कानून को मानवीय बनाने की जरूरत: प्रो. शुभम श्रीवास्तव
राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय (NUSRL), रांची के सहायक प्राध्यापक प्रो. शुभम श्रीवास्तव ने नशा नियंत्रण के कानूनी पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कई नशा पीड़ित लोग कानूनी कार्रवाई के भय से इलाज और मदद लेने से बचते हैं। उन्होंने एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि महानगरों में नशा विरोधी अभियानों में समाज के कमजोर वर्ग अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने सिक्किम एंटी ड्रग एक्ट, 2006 का उदाहरण देते हुए कानून में मानवीय सुधारों के सकारात्मक परिणामों की जानकारी दी।
पत्रकार निभाएं अहम भूमिका: दूरदर्शन समाचार
दूरदर्शन समाचार झारखंड के प्रमुख एवं सहायक निदेशक श्री दिवाकर कुमार ने स्थानीय सामाजिक परिवेश में नशे के दुष्प्रभावों पर चर्चा की और पत्रकारों से सरकार की नशा मुक्ति पहलों को जनसामान्य तक पहुंचाने की अपील की।
धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में दूरदर्शन समाचार संपादक सह क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी श्री गौरव पुष्कर ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि ‘वार्तालाप’ जैसे संवाद कार्यक्रम सरकार की योजनाओं को सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने नशा मुक्त युवा पीढ़ी को विकसित भारत के लक्ष्य की कुंजी बताया। कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकारों ने आयोजन की सराहना करते हुए सरकार के अभियानों को जनसाधारण तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में पीआईबी से प्रिंस कुमार, शिवानी कुमारी केसरी एवं शिवेंद्र नाथ तिवारी भी उपस्थित रहे।