अवैध कब्जे और फर्जी निर्माण की भेंट चढ़ा शहर का ऐतिहासिक जलस्रोत, नगर निगम आज से शुरू करेगा ड्रोन सर्वे और मापी
Highlights:
- रांची के बड़े तालाब की 36 एकड़ जमीन वर्षों में हुई गायब
- मूल रूप से 53 एकड़ में फैला था ऐतिहासिक जलस्रोत
- नगर निगम आज से शुरू करेगा जमीन की तलाश और मापी
- ड्रोन सर्वे से अतिक्रमण की होगी सटीक पहचान
- निगम प्रशासक ने अतिक्रमण मुक्त कराने का दिया स्पष्ट आदेश
विस्तार :
रांची की पहचान पर संकट
राजधानी रांची की पहचान माने जाने वाला ऐतिहासिक बड़ा तालाब कभी लगभग 53 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ था, लेकिन आज इसकी वास्तविक स्थिति बेहद चिंताजनक है। समय के साथ यह विशाल जलस्रोत सिमटकर मात्र 17 एकड़ में रह गया है। शेष करीब 36 एकड़ भूमि पर बीते कई वर्षों से अवैध कब्जे, फर्जी निर्माण और भू-माफियाओं की संगठित गतिविधियां हावी होती चली गईं।
यह मामला केवल एक जलाशय के अस्तित्व के संकट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी प्रशासन की निष्क्रियता, पर्यावरण संरक्षण के प्रति लापरवाही और राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण के गहरे गठजोड़ पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
आज से शुरू होगी गायब जमीन की तलाश
नगर निगम की हालिया जांच में यह सामने आया है कि बड़ा तालाब के चारों ओर का बड़ा हिस्सा अवैध कब्जे में चला गया है। अब इस मामले में कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली गई है। नगर निगम की टीम सोमवार (22 दिसंबर 2025) से तालाब की जमीन की विस्तृत मापी शुरू करेगी। इसके साथ ही अतिक्रमण को चिह्नित करने के लिए ड्रोन के जरिए सर्वे कराया जाएगा।
ड्रोन सर्वे से खुलेगा अतिक्रमण का पूरा खेल
नगर निगम द्वारा ड्रोन मैपिंग के जरिए तालाब की मूल सीमा और वर्तमान स्थिति का मिलान किया जाएगा। इसके तहत—
- अतिक्रमण पर बने भवनों की मापी
- भवन नक्शों की वैधता की जांच
- फर्जी दस्तावेजों की पड़ताल
की जाएगी। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से यह स्पष्ट हो जाएगा कि कहां-कहां तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है।
निगम प्रशासक ने दिए सख्त निर्देश
नगर निगम की यह कार्रवाई निगम प्रशासक सुशांत गौरव के निर्देश पर शुरू की जा रही है। प्रशासक की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में बड़ा तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने का स्पष्ट आदेश दिया गया है।
बलपूर्वक तोड़फोड़ की भी तैयारी
प्रशासक ने साफ कहा है कि यदि स्वेच्छा से अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो नगर निगम बलपूर्वक तोड़फोड़ की कार्रवाई करेगा। साथ ही अवैध कब्जाधारियों पर कानूनी कार्रवाई और केस दर्ज करने की भी तैयारी है।
ऐतिहासिक धरोहर, लापरवाही बर्दाश्त नहीं
निगम प्रशासक सुशांत गौरव ने कहा कि बड़ा तालाब रांची शहर की ऐतिहासिक पहचान है। इसके संरक्षण में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ड्रोन मैपिंग से तालाब की वास्तविक सीमा पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।
दस्तावेजों की जांच में बड़ा खुलासा
नगर निगम के दस्तावेजों के अनुसार—
- बड़ा तालाब और आसपास की करीब 53 एकड़ जमीन निगम के स्वामित्व में दर्ज है
- वर्तमान में सिर्फ 17 एकड़ जमीन ही मौजूद है
- यानी करीब 36 एकड़ जमीन गायब हो चुकी है
यह खुलासा तब हुआ, जब नगर निगम ने संपत्तियों के डिजिटलाइजेशन के दौरान दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की।
180 साल पुराना है बड़ा तालाब
इतिहास के अनुसार, लगभग 180 वर्ष पूर्व शहर का यह बड़ा तालाब करीब 52 एकड़ क्षेत्रफल में खोदा गया था। वर्ष 1845 में कुंवर श्रीनाथ द्वारा पक्के घाटों का निर्माण कराया गया था। लेकिन समय के साथ अतिक्रमणकारियों ने तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया और यह ऐतिहासिक जलस्रोत सिमटता चला गया।
अब अतिक्रमण मुक्त होगा बड़ा तालाब
अब नगर निगम विस्तृत मापी, ड्रोन सर्वे और आधुनिक संसाधनों की मदद से अवैध कब्जों की पहचान करेगा और उन स्थानों को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में सख्त कदम उठाएगा।
