Friday, March 6, 2026
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चारागाह पर कब्जे के खिलाफ उभरा जनसैलाब, राजभवन के सामने ग्रामीणों का ऐतिहासिक प्रदर्शन

रांची- आज रांची की सड़कों पर सिर्फ़ भीड़ नहीं थी, बल्कि उन पूर्वजों की विरासत की गूंज थी, जिनकी ज़मीन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। झारखण्ड पड़हा समिति के नेतृत्व में राजभवन (लोक भवन) के सामने सैकड़ों ग्रामीणों का आक्रोश एक सैलाब बनकर उमड़ा। यह लड़ाई केवल ज़मीन की नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादा, ग्रामसभा के अधिकार और आदिवासी स्वशासन की रक्षा की है।

आंदोलन का नेतृत्व पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, सरन समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, लाल किशोर नाथ शाहदेव, शांतनु मिश्रा समेत अन्य सामाजिक प्रतिनिधियों ने किया।

इस अवसर पर बंधु तिर्की ने कहा कि नामकुम अंचल के कूट्टेटोली मौजा की 5 एकड़ ज़मीन (खाता संख्या–144, प्लॉट संख्या–887), जिसे ग्रामीण ओबरिया कूट्टेटोली टोंगरी के नाम से जानते हैं, सदियों से ओबरिया, भुसूर और चंदाघासी गांवों के पशुओं का चारागाह रही है। यह भूमि केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीणों की आजिविका, संस्कृति और सामूहिक अस्तित्व का आधार है।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में ग्रामसभा की अनुमति को दरकिनार कर, कथित तौर पर फर्जी अनुमति दिखाते हुए इस चारागाह को “व्यक्ति विकास केन्द्र इंडिया” नामक संस्था के नाम बंदोबस्त कर दिया गया। यह कदम पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और ग्रामसभा के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि अवैध कब्जे का विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया गया और संस्था के प्रतिनिधियों द्वारा स्थानीय लोगों पर फर्जी मुकदमे लादे गए। बावजूद इसके, कूट्टेटोली की ग्रामसभा आज भी डटकर खड़ी है। उपायुक्त से लेकर वरीय अधिकारियों तक गुहार लगाने के बाद अब न्याय की यह आवाज़ राजभवन तक पहुंची है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार के समक्ष स्पष्ट मांगें रखीं—

  • राज्य कैबिनेट में विशेष निर्णय लेकर अवैध बंदोबस्ती को तत्काल रद्द किया जाए।
  • रद्दीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक ग्रामसभा कूट्टेटोली का कब्जा बरकरार रखा जाए।

संबंधित भूमि की जमाबंदी तत्काल फ्रीज की जाए।

प्रदर्शन में सभा के अध्यक्ष अजित उरांव, अजय टोप्पो, राधे तिर्की, निगा विर्भ, बेला कच्छप, मेरी कच्छप, उषा कच्छप, फुलमनी, सुनीता देवी, सुषमा कच्छप, नेहा देवी, सबीता कच्छप और सीता कच्छप समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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