इंजरी नदी में अवैध बालू खनन से बढ़ा प्रदूषण, ग्रामीण बोले—नदी मर रही है, हम भी बीमार पड़ रहे हैं
Highlights:
- इंजरी नदी का पानी हुआ मटमैला, ग्रामीणों ने किया पानी में उतरकर विरोध
- ग्रामीणों का आरोप—अवैध बालू खनन से नदी पूरी तरह प्रदूषित
- प्रशासनिक उदासीनता पर भड़के ग्रामीण
- चेतावनी—कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा तेज
- कई ग्रामीणों में त्वचा रोग और पेट की बीमारियों के लक्षण
विस्तृत
बोकारो: बोकारो जिले के चांदनकियारी प्रखंड से होकर गुजरने वाली इंजरी नदी कभी अपने स्वच्छ और निर्मल जल के लिए जानी जाती थी। ग्रामीण इस नदी का सेवन दैनिक जरूरतों—जैसे पीने, नहाने, खेती और घरेलू कार्यों में करते थे। लेकिन अब इस नदी का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। मटमैला, बदबूदार और प्रदूषित पानी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीणों के अनुसार, नदी के प्रदूषण का मुख्य कारण अवैध बालू खनन है। बताया जा रहा है कि नदी से दिन-रात मशीनों से अवैध रूप से बालू निकाला जा रहा है, जिसकी वजह से नदी की प्राकृतिक धारा और संरचना बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है।
पानी में उतरकर विरोध, प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
प्रदूषण का स्तर बढ़ने और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आज स्थानीय युवाओं ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। ग्रामीण युवक नदी के गंदे पानी में उतरकर धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नदी मर रही है और उसके साथ गांव का भविष्य भी अंधकार में जा रहा है।
‘बालू माफिया नदी को खत्म कर रहे हैं’ — ग्रामीणों का आरोप
आंदोलन कर रहे युवकों ने आरोप लगाया कि प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बालू माफिया हैं, जो अवैध खनन कर रहे हैं और संबंधित विभाग आँख बंद किए बैठा है। युवकों ने कहा— “अगर प्रशासन बालू माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं करेगा तो आंदोलन और बड़ा होगा। हम चुप नहीं बैठेंगे।”
प्रदूषित पानी से ग्रामीणों में बीमारी बढ़ी
ग्रामीणों ने बताया कि प्रदूषित पानी के कारण लोगों में त्वचा रोग, पेट दर्द, बुखार और संक्रमण जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं। नदी का पानी किसी भी उपयोग के लायक नहीं बचा है।
ग्रामीण युवक ने कहा
“हमारी नदी को बालू माफियाओं ने बर्बाद कर दिया है। प्रशासन कुछ नहीं कर रहा। हम आंदोलन जारी रखेंगे।”
