महालक्ष्मी, श्रीगणेश, कुबेर और सरस्वती की उपासना का सर्वोत्तम दिवस — जब पृथ्वी लोक पर स्वयं आती हैं लक्ष्मी मां
हाइलाइट्स:
- दीपावली हिंदू धर्म का सबसे पवित्र और शुभ पर्व माना गया है।
- पद्म, स्कंद, भविष्य पुराण में इस दिन लक्ष्मी पूजन का महत्व बताया गया है।
- मान्यता है कि इस रात्रि को मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं।
- स्वच्छता, संयम और दीपदान से लक्ष्मी की कृपा स्थायी होती है।
- शास्त्रों में दान और संयम को दीपावली की आत्मा कहा गया है।
विस्तार
कार्तिक अमावस्या की रात को मनाया जाने वाला दीपावली पर्व हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और पवित्र त्योहार माना गया है।
पद्म पुराण, स्कंद पुराण, भविष्य पुराण तथा लक्ष्मी तंत्र में इस दिन को मां महालक्ष्मी, भगवान श्रीगणेश, कुबेर और मां सरस्वती की उपासना का सर्वोत्तम दिवस बताया गया है।
धार्मिक मान्यता है कि इस रात्रि को महालक्ष्मी स्वयं पृथ्वी लोक पर भ्रमण करती हैं, और जिन घरों में स्वच्छता, संयम, दीपदान, जप और शुद्ध मन से पूजा की जाती है, वहां स्थायी लक्ष्मी का वास होता है।
घर की शुद्धि और दीप सज्जा
कार्तिक अमावस्या के दिन प्रातः स्नान के बाद घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थान और आंगन की सफाई करना आवश्यक है।
चावल, हल्दी, गोमूत्र, गंगाजल या गौ-गोबर से शोधन शास्त्रसम्मत माना गया है।
मुख्य द्वार पर रंगोली और स्वस्तिक का चिन्ह बनाना शुभ है — यह मंगल और लक्ष्मी प्रवेश का प्रतीक है।
संध्या काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा
शास्त्रों के अनुसार संध्या बेला (प्रदोष काल) में पूजन करना सर्वोत्तम माना गया है।
पूजा सामग्री: फूल, रोली, चावल, दीपक, धूप, कपूर, सिक्का, कलावा, कलश, पंचमेवा, पंचामृत, नैवेद्य, मिठाई, कमल गट्टा इत्यादि।
पूजा विधि क्रमवार:
- श्रीगणेश का आह्वान — “ॐ गं गणपतये नमः”
- महालक्ष्मी ध्यान — “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”
- कलश स्थापना, दीप प्रज्वलन
- कुबेर देव और सरस्वती जी का ध्यान
- महालक्ष्मी चालीसा, श्रीसूक्त, या कनकधारा स्तोत्र का पाठ
- पुष्प अर्पण, नैवेद्य, कपूर आरती
- तिजोरी और खाते पर स्वस्तिक बनाकर दीपक रखना
दीपदान का महत्व
दीपावली की अंधेरी रात को प्रकाश से भरना ही इसका मुख्य भाव है।
घर के हर कोने, आंगन, तुलसी चौरा, छत और दरवाजे पर दीपक रखें।
एक दीपक पीपल वृक्ष या नदी/तालाब किनारे दान करना शुभ माना गया है।
धर्मशास्त्रों के अनुसार — “दीपदान से गृह दोष शांत होते हैं और समृद्धि स्थायी बनती है।”
दान और सेवा का पुण्य
इस दिन गाय, ब्राह्मण, गरीब या जरूरतमंद को दान करना सर्वोत्तम कर्म माना गया है।
शास्त्र कहते हैं — “दान से लक्ष्मी स्थायी होती हैं और संकट दूर होते हैं।”
दिवाली पर क्या नहीं करें
वे कार्य जिन्हें दिवाली के दिन करना अशुभ माना गया है।
शास्त्रीय कारण / मान्यता
इन कर्मों के पीछे धर्मशास्त्रों और परंपराओं में बताए गए तर्क।
1. झूठ बोलना, कटु वचन या विवाद करना
कारण: अमावस्या की रात्रि में तमोगुण बढ़ जाता है। कहा गया है कि इस दिन वाणी में कठोरता और झूठ से लक्ष्मी दूर रहती हैं।
2. देर तक सोना
कारण: प्रातःकाल में लक्ष्मीनारायण का आवाहन काल रहता है। देर तक सोने से उस शुभ ऊर्जा का प्रभाव घट जाता है।
3. मांस और मदिरा का सेवन
कारण: यह कर्म “अलक्ष्मी कर्म” कहलाता है, यानी ऐसा कार्य जो धन, शांति और सौभाग्य को नष्ट करता है।
4. तिजोरी या खाते खाली रखना
कारण: इसे वित्तीय दृष्टि से अशुभ माना गया है। मान्यता है कि लक्ष्मी खाली स्थान पर नहीं ठहरतीं।
5. झाड़ू पर पैर रखना या रात में झाड़ू लगाना
कारण: झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। इस पर पैर रखना या रात्रि में इसे चलाना लक्ष्मी तत्त्व का अपमान माना जाता है।
धर्मग्रंथों में दीपावली का महत्व
- स्कंद पुराण: दीपावली अमावस्या पर दीपदान से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और लक्ष्मी का वास होता है।
- पद्म पुराण: लक्ष्मी पूजन से घर में सौभाग्य और धन की स्थिरता आती है।
- भविष्य पुराण: कुबेर पूजन से व्यापार-लाभ और धनवृद्धि का योग बढ़ता है।
दिवाली पर यह अवश्य करें
- आरती के बाद “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय नमः” मंत्र का जप करें।
- घर में 9 या 11 दीपक पूरी रात जलते रहें — इसे अखण्ड दीप कहा गया है।
- बुजुर्गों के चरण स्पर्श करें — यही गृह-लक्ष्मी का प्रथम आशीर्वाद है।
ज्ञात हो कि दीपावली केवल रोशनी का नहीं, बल्कि धर्म, संयम, दान और वैदिक परंपरा का पर्व है।
शास्त्रसम्मत पूजा, स्वच्छता और दान के साथ किया गया लक्ष्मी-गणेश पूजन जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति प्रदान करता है।
