Sunday, January 11, 2026
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गिरिडीह में पारसनाथ जोन के दो नक्सलियों ने किया सरेंडर — प्रयाग उर्फ़ विवेक के दस्ते का सक्रिय सदस्य भी शामिल

एक करोड़ के इनामी नक्सली के साथ सक्रिय रहे दंपति ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का किया वादा; पुलिस ने आत्मसमर्पण नीति का दिया श्रेय

Highlights :

  • पारसनाथ जोन के दो सक्रिय नक्सली शिवलाल हेम्ब्रम (शिवा) और पत्नी सरिता हांसदा (उर्मिला) ने गिरिडीह पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

  • दोनों खुखरा थाना क्षेत्र के निवासी हैं और पुलिस की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित बताए गए।

  • दोनों का संबंध प्रयाग मांझी उर्फ़ विवेक के दस्ते से है; प्रयाग पर 1 करोड़ रुपए इनाम था।

  • सुरक्षा एजेंसियों — इंटेलिजेंस ब्यूरो, स्पेशल ब्रांच एवं अन्य — की सहभागिता में प्रक्रिया पूरी हुई।

  • डीआईजी, डीसी और एसपी सहित उच्च पुलिस अधिकारी प्रेस वार्ता में मौजूद रहे; मुख्यधारा लौटने वालों को स्वागत किया गया।

गिरिडीह : नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान और झारखंड पुलिस की आत्मसमर्पण नीति का असर दिखा है। पारसनाथ जोन के दो सक्रिय नक्सलियों  शिवलाल हेम्ब्रम उर्फ़ शिवा और उनकी पत्नी सरिता हांसदा उर्फ़ उर्मिला ने बुधवार को गिरिडीह के पपरवाटांड़ स्थित नए पुलिस लाइन में आधिकारिक तौर पर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों खुखरा थाना क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।

इस संबंध में आयोजित प्रेसवार्ता में मुख्य रूप से सीआरपीएफ के डीआईजी अमित कुमार मौजूद थे। डीआईजी ने बताया कि दंपति प्रयाग मांझी उर्फ़ विवेक के दस्ते में सक्रिय सदस्य के रूप में काम कर चुके हैं। प्रयाग पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। दोनों पर पारसनाथ जोन का कमान संभालने का भी आरोप है।

डीआईजी अमित कुमार ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से इन नक्सलियों के आत्मसमर्पण की बात चुनावी तथा सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से चल रही थी और आज वे सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी एवं विश्वास के साथ मुख्यधारा में लौटे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति शरण व पुनर्वास के साथ-साथ समाज में लौटने का रास्ता खोलती है और इसी नीति से प्रभावित होकर कई नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि दोनों के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया में इंटेलिजेंस ब्यूरो, स्पेशल ब्रांच और अन्य संबंधित सुरक्षा इकाइयों का समन्वय रहा। आत्मसमर्पण के बाद दंपति को सरकारी नीति के अंतर्गत आगे की औपचारिकताओं और पुनर्वास प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों के सुपुर्द किया गया।

प्रेसवार्ता में डीसी रामनिवास यादव, एसपी डॉ. बिमल कुमार और एएसपी अभियान सुरजीत कुमार भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने मुख्यधारा से भटके हुए अन्य नक्सलियों से भी अपील की कि वे सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाकर शांति और विकास के रास्ते पर लौटें। साथ ही चेतावनी दी गई कि जो लोग हथियार उठाये रहेंगे उन्हें सुरक्षाबलों के समक्ष कानूनी और सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। (अधिकारियों के शब्दों में  “सरेंडर करो या गोली खाने के लिये तैयार रहो” यह पत्रिका में उद्धृत चेतावनी सुरक्षा दल की कड़ी नीति को दर्शाती है।)

प्रभाव : गिरिडीह में पिछले वर्षों में नक्सली गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने सक्रिय अभियान चलाये हैं। आत्मसमर्पण करने वालों को स्थानीय पुनर्वास व रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी किये जा रहे हैं ताकि वे मुख्यधारा में स्थायी रूप से शामिल हो सकें। आज के आत्मसमर्पण को पुलिस ने एक बड़ी सफलता करार दिया है और इसे क्षेत्र में शांति कायम करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ऐसे आत्मसमर्पण स्थानीय स्तर पर नक्सली प्रभाव कम करने में सहायक होंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन द्वारा दी जा रही पुनर्वास व समेकन योजनाओं का कितना सकारात्मक असर होता है और क्या इससे अन्य नक्सली भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित होते हैं।

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