Saturday, March 14, 2026
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दीपावली में जानें माता लक्ष्मी की पूजन विधि की शुभ मुहूर्त, भूलकर भी न करें ये काम

लक्ष्मी पूजन 2024 कब?

वैदिक पंचांग के अनुसार, दिवाली की तिथि उदया तिथि के आधार पर तय होता है। दिवाली की पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में होती है। पंचांग के अनुसार इस साल कार्तिक मास अमावस्या तिथि की शुरुआत 31 अक्टूबर 2024 को 3 बजकर 52 मिनट पर होगी और इस तिथि का समापन 1 नवंबर 2024 को 6 बजकर 16 मिनट पर होगा। ऐसे में लक्ष्मी पूजन 31 अक्टूबर को ही किया जाएगा।

दिवाली 2024 की तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि का समापन 1 नवंबर को 6 बजकर 16 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि के समापन के बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी और इस तिथि पर मांगलिक पूजन वर्जित माने जाते हैं। ऐसे में इस साल दीपावली 31 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी।

दिवाली 2024 लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, दिवाली पर प्रदोष काल की शुरुआत शाम 5 बजकर 36 मिनट से हो रही है और इसका समापन शाम को 8 बजकर 11 मिनट पर होगा। जबकी वृषभ लग्न की शुरुआत शाम 6 बजकर 25 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। ऐसे में शाम 6 बजकर 25 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 20 मिनट के बीच लक्ष्मी पूजन करना विशेष फलदायी रहेगा।

लक्ष्मी पूजन की सामग्री

पूजा के दौरान धन की देवी मां लक्ष्मी को फल, फूल, धूप, दीप, हल्दी, अखंडित चावल, बताशा, सिंदूर, कुमकुम, अबीर-गुलाल, सुगंधित द्रव्य और नैवेद्य आदि चीजें अर्पित करें। पूजा के समय लक्ष्मी चालीसा का पाठ, लक्ष्मी स्तोत्र और मंत्र जप करें। पूजा के अंत में आरती करें।

पूजा में क्या नही चढ़ाना चाहिए

शास्त्रों के अनुसार, माता लक्ष्मी और माता पार्वती को मोगरा, चंपा, रातरानी आदि जैसे सफेद फूल इन दोनों ही देवियों को नहीं चढ़ाने चाहिए। क्योंकि, यह फूल भी सफेद रंग के होते हैं। यदि आप ऐसा करते हैं तो जाने-अनजाने में माता लक्ष्मी को नाराज कर सकते हैं।

दिवाली लक्ष्मी पूजन विधि

दिवाली के दिन शाम के समय लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना जाता है। लक्ष्मी पूजन के लिए ईशान कोण या उत्तर दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इस दिन पूजा घर की साफ-सफाई करने के बाद सबसे पहले वहां स्वास्तिक बनाएं। उसके बाद एक कटोरी में चावल रखें। फिर लकड़ी को चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और उसपर माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि माता लक्ष्मी के साथ गणेश जी और कुबेर जी की तस्वीर भी होनी चाहिए। अब इन देवी-देवताओं पर गंगाजल छिड़के। उसके बाद माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी को पुष्प, धूप, दीप, अक्षत और दक्षिणा अर्पित करें। फिर तिलक लगाएं और भोग चढ़ाएं। आखिरी में आरती करें और उसके बाद पूरे घर और मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर रख दें।

पूजा के बाद क्या नही करना चाहिए

कुछ लोगों की आदत होती है कि वो दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के कुछ देर बाद, रात में ही पूजा स्थल की चीजों को समेटने में लग जाते हैं। पूजा की चौकी, लक्ष्मी एवं गणेश जी की मूर्ति को रात में ही हटा देते हैं लेकिन ऐसा करना बिल्कुल गलत है। दरअसल धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के बाद रात में ही माता लक्ष्मी का आगमन होता है, ऐसे में पूजा के बाद रात में ही पूजा स्थल की सफाई करना शुभ नहीं है। इसलिए बेहतर यही है कि हमेशा अगले दिन ही पूजा स्थल की चीजों को हटाएं।

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