बोकारो के मजदूर मैदान में विगत एक सप्ताह से जारी गांधी शिल्प बाजार कुव्यवस्था के साथ ही समाप्त हो गया। बोकारो वासियों को हस्तशिल्प से संबंधित सामग्री का लाभ नहीं मिल पाया।
हस्तशिल्प विकास संस्थान, हजारीबाग झारखण्ड द्वारा विगत 24 जनवरी से मजदूर मैदान सेक्टर-4 बोकारो, झारखण्ड में गाँधी शिल्प बाजार का आयोजन हुआ।
10 दिन के बाद भी पूरा स्टाॅल को नहीं भरा गया तथा एवं स्टाॅल में नबंरिग, क्राफ्ट एवं कारीगर नहीं दर्शाया गया एवं बहुत से स्टाॅल में हस्तशिल्प समान नहीं थे। लोकल का स्वर के नाम पर लगाए गए इस मेल में एक भी लोकल समान नजर नहीं आया बोकारो जिले के कारीगर इसका लाभ लेने से बंचित रह गए।
हस्तशिल्प मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रायोजित इस मेले में स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने तथा बोकारो वासियों को हस्तशिल्प से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए यह मेला लगाया गया ।
कारीगरों द्वारा स्टाॅक नहीं लाया गया, सिर्फ खानापूर्ति की गई। प्रचार प्रसार नहीं किए जाने के कारण मेला में स्थानीय लोगों का भीड़ नहीं के बराबर रहा।
स्थानीय कारीगरों ने बताया कि हस्तशिल्प कारीगर के उत्थान एवं कार्य से कोई मतलब नही रह गया है।
भारी बजट खर्च करने के बावजूद यह मेला अपने प्रारूप में नजर नहीं आया। स्थानीय दर्शन रवि कुमार ,फुलेंद्र रविदास, किरण कुमारी ने बताया कि मेले में स्थानीय सामग्री तथा हस्त शिल्प विकास से संबंधित सामग्री का अभाव का आलम छाया रहा।