कोपे पंचायत में मनरेगा कर्मी व बिचौलियों की मिली भगत से लूट की छूट।
मनिका लातेहार मनिका: कोपे पंचायत में जनप्रतिनिधियों और पंचायतकर्मियों के मिलीभगत से खाता 148 के प्लाट संख्या 684 में दीपनारायण सिंह पिता गिरवर सिंह के हिस्से कुल 1 एकड़ 33 डिसमिल जमीन पड़ता है तथा उन्ही के खानदान में बिनोद सिंह व उसका भाई उधो सिंह दोनों भाईयों के हिस्से भी 1 एकड़ 33 डिसमिल जमीन पड़ता है लेकिन पंचायत कर्मियों ने इस सीमित टांड़ जमीन के लिए तीन परिवारों के 11 सदस्यों के नाम से फर्जी योजना रिकॉर्ड तैयार कर कुल 16 एकड़ में टीसीबी निर्माण दिखाकर कुल 5.74005 लाख रूपये गबन कर लिए हैं।
उधो सिंह उनकी पत्नी लीलावती देवी और बेटी प्रिया कुमारी तीनों के नाम 2-2 एकड़ टीसीबी योजना का फर्जी रिकॉर्ड तैयार कर 2.20320 लाख रूपये गबन कर ली गई। उधर उनके दूसरे भाई बिनोद सिंह,पत्नी सोनमतीया देवी और दोनों बेटे त्रिपुरारी सिंह व बिनोद सिंह चारों परिवारों के नाम 6 एकड़ में टीसीबी योजना क्रियान्वित दिखाया गया है। इन योजनाओं के जरिये अब तक 1.59375 लाख रूपये डकार ली गई। सिर्फ इतना ही नहीं दीपनारायण सिंह पत्नी लक्ष्मी देवी,बेटा नागेंद्र सिंह और बहु सोना देवी के नाम से भी 6 एकड़ में टीसीबी योजना क्रियान्वित दिखाकर 1.94310 लाख रूपये का फर्जीवाड़ा किया गया जबकि उनके जमीन में एक भी टीसीबी की खुदाई नहीं की गई है।

सभी योजनाओं में मनरेगा प्रावधानों की पूरी तरह अनदेखी की गई है योजनाओं का चयन जगतू ग्राम सभा से नहीं की गई है जो मनरेगा अधिनियम की धारा 16 (1) का उल्लंघन है। योजना दस्तावेज में लाभुकों एवं जगतू गांव के ग्राम प्रधान अरुण सिंह के हस्ताक्षर नहीं लिए गए हैं। फर्जीवाड़े के इस खेल में नरेगा मेट,रोजगार सेवक,पंचायत सेवक,ग्राम पंचायत मुखिया,कनीय अभियंता,सहायक अभियंता,कंप्यूटर ओपरेटर,प्रखण्ड कार्यक्रम पदाधिकारी,जेरुआ के ग्राम प्रधान आदि लोग सीधे तौर पर जिम्मेवार हैं।
इनके अतिरिक्त वे सभी मजदूर भी सहभागी हैं जिनके खाते में मजदूरी राशि भेजी गई और चंद पैसे लेकर ठेकेदारों को मजदूरी का बड़ा हिस्सा प्रत्यक्ष तौर से चुकाते रहे हैं। कोपे पंचायत में मनरेगा योजनाओं में बरती गई घोर अनियमितता से सम्बंधित विस्तृत जाँच प्रतिवेदन के साथ कड़ी कार्रवाई हेतु जिले के उपायुक्त सह जिला कार्यक्रम समन्वयक हिमांशु मोहन को सौंपी गई है। उन्होंने सख्त से सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। कार्रवाई में विलम्ब की स्थिति में इस मामले को राज्य सरकार और ग्रामीण विकास विभाग,भारत सरकार के सम्बंधित अधिकारियों को भी सौंपा जाएगा।
