झारखंड मंत्रालय में पत्रकारों से बोलीं मंत्री, असम में आदिवासियों की स्थिति पर भी जताई चिंता
Highlights
- कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से रूबरू हुईं कृषि मंत्री
- केंद्रीय बजट में कृषि क्षेत्र को लेकर उठाए सवाल
- विदेशी प्रोडक्ट और मशीनरी की एंट्री पर जताई चिंता
- भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धा क्षमता पर सवाल
- असम दौरे का अनुभव भी किया साझा
- आदिवासियों की स्थिति को बताया चिंताजनक

विस्तार
रांची : झारखंड मंत्रालय में आयोजित बैठक के उपरांत राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की पत्रकारों से रूबरू हुईं। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट पर अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया व्यक्त की।
कृषि क्षेत्र में विदेशी एंट्री पर आपत्ति
कृषि मंत्री ने कहा कि इस बार के केंद्रीय बजट के माध्यम से कृषि क्षेत्र में विदेशी उत्पादों और मशीनरी को भारतीय बाजार में प्रवेश मिल चुका है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि
- क्या भारतीय किसान इतने मजबूत हैं कि विदेशी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा कर सकें?
- क्या छोटे और सीमांत किसान इस दबाव को झेल पाएंगे?
उनके अनुसार, आने वाले समय में इसका प्रभाव देश की कृषि व्यवस्था की “रीढ़” पर पड़ सकता है।
किसानों की आर्थिक स्थिति पर चिंता
मंत्री ने कहा कि पहले से ही किसान कई आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में विदेशी बाजार के लिए दरवाजे खोलना किसानों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
असम को लेकर भी दिया बयान
पत्रकारों के सवालों के जवाब में शिल्पी नेहा तिर्की ने असम के अपने अनुभव भी साझा किए।
उन्होंने कहा कि यदि वहां के आदिवासी समुदाय की स्थिति को नजदीक से देखा और समझा जाए, तो ऐसा महसूस होता है मानो देश के भीतर ही कोई अलग शासन व्यवस्था चल रही हो।
आदिवासियों की स्थिति बताई चिंताजनक
मंत्री ने कहा कि निचले स्तर के लोगों की आवाज सुनने और उन्हें न्याय दिलाने वाला कोई प्रभावी तंत्र वहां दिखाई नहीं देता।
उन्होंने आदिवासी समुदाय की सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति को गंभीर चिंता का विषय बताया।
