संत जेवियर स्कूल डोरंडा में हुआ ‘AI Unlocked: Work Smarter Not Harder’ का लोकार्पण
Headline
- रांची में AI पर लिखी किताब का भव्य विमोचन
- संत जेवियर स्कूल में टेक्नोलॉजी का बड़ा आयोजन
- AI पर आधारित किताब लॉन्च, छात्रों में उत्साह
- AI Unlocked’ ने खोले डिजिटल भविष्य के रास्ते
- रांची में शिक्षा और तकनीक का संगम
रांची से बड़ी खबर सामने आई है, जहां संत जेवियर स्कूल, डोरंडा परिसर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक महत्वपूर्ण पुस्तक का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में शिक्षा जगत और छात्रों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।
इस अवसर पर रांची विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डी.के. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पुस्तक ‘AI Unlocked: Work Smarter Not Harder’ का औपचारिक लोकार्पण किया और कहा कि आने वाला समय तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, जिसमें छात्रों और युवाओं की भूमिका बेहद अहम होगी।
शिक्षा और तकनीक का संगम
कार्यक्रम के दौरान संत जेवियर स्कूल के फादर, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और शिक्षा जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। समारोह का माहौल उत्साहपूर्ण और प्रेरणादायक रहा।
पुस्तक के लेखक डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि आज का दौर AI का दौर बन चुका है और आने वाले समय में इसके बिना काम करना बेहद कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक का उद्देश्य आम लोगों, छात्रों और पेशेवरों को यह समझाना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कैसे किया जाए और इसे अलग-अलग क्षेत्रों में किस तरह प्रभावी रूप से अपनाया जा सकता है।
AI की दुनिया को सरल भाषा में समझाने की कोशिश
डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि इस पुस्तक में
- AI का बेसिक परिचय
- शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और व्यवसाय में AI का उपयोग
- डिजिटल दुनिया में AI की भूमिका
- छात्रों और युवाओं के लिए AI के अवसर
- भविष्य की तकनीकी चुनौतियां
जैसे विषयों को सरल और व्यावहारिक भाषा में प्रस्तुत किया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग AI की समझ विकसित कर सकें।
युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश
मुख्य अतिथि कुलपति डी.के. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि AI न केवल तकनीकी क्षेत्र, बल्कि शिक्षा और रोजगार के नए रास्ते खोल रहा है। उन्होंने छात्रों को तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलने और नवाचार को अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम का महत्व
यह पुस्तक विमोचन समारोह सिर्फ एक साहित्यिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह तकनीक और शिक्षा के बीच बढ़ते संबंध का प्रतीक भी रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी किताबें छात्रों और समाज को डिजिटल भविष्य के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
