Monday, January 19, 2026
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JPSC होम्योपैथी चिकित्सक नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल, अनुभव-स्थानीयता और पारदर्शिता पर पुनर्विचार की मांग

 लंबे समय से संविदा पर सेवा दे रहे आयुष चिकित्सकों ने चयन मानकों में असंतुलन का आरोप, नीति सुधार की अपील

Highlights :

  • JPSC की होम्योपैथी चिकित्सक बहाली प्रक्रिया पर आयुष चिकित्सकों की आपत्ति
  • 9–12 वर्षों से संविदा पर कार्यरत डॉक्टरों के अनुभव को पर्याप्त वेटेज नहीं मिलने का आरोप
  • झारखंड आयुष परिषद के पंजीकरण को प्राथमिकता देने की मांग
  • MBBS और होम्योपैथी नियुक्ति प्रक्रिया में समानता के अभाव पर सवाल
  • चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और न्यायसंगतता पर पुनर्विचार की मांग

विस्तार :

रांची (Ranchi)- झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा होम्योपैथी चिकित्सा पदाधिकारी की स्थायी नियुक्ति के लिए अपनाई जा रही चयन प्रक्रिया को लेकर राज्य के आयुष (होम्योपैथी) चिकित्सकों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि वर्तमान भर्ती प्रणाली में अनुभव, स्थानीयता और पारदर्शिता जैसे अहम पहलुओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है।

विशेष रूप से वे चिकित्सक, जो पिछले 9 से 12 वर्षों से संविदा के आधार पर झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार योगदान दे रहे हैं, मानते हैं कि उनके दीर्घकालिक अनुभव का मूल्यांकन अपेक्षित रूप से नहीं हो रहा। उनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया में अनुभव आधारित अंकों का व्यावहारिक प्रभाव लगभग नगण्य हो गया है।

पंजीकरण व्यवस्था पर उठे सवाल

आयुष चिकित्सकों ने पंजीकरण मानकों को लेकर भी असंतोष जताया है। उनका सुझाव है कि नियुक्ति प्रक्रिया में

  • झारखंड राज्य आयुष परिषद के पंजीकरण को प्राथमिक आधार
  • जबकि केंद्रीय होम्योपैथी परिषद (CCH) के पंजीकरण को पूरक आधार
    के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। इससे पंजीकरण प्रणाली अधिक स्पष्ट, संतुलित और न्यायसंगत बन सकेगी। चिकित्सकों का यह भी कहना है कि पंजीकरण में कथित अनियमितताओं के कारण JPSC को 5 से 7 मार्च 2026 के बीच लिखित परीक्षा की संभावित तिथि घोषित करनी पड़ी, जिससे अनुभव आधारित वेटेज का महत्व और कम हो गया है।

MBBS और होम्योपैथी बहाली में असमानता का आरोप

चिकित्सकों ने यह मुद्दा भी उठाया कि अन्य राज्यों सहित झारखंड में MBBS चिकित्सकों की नियुक्ति केवल साक्षात्कार और शैक्षणिक अंकों के आधार पर होती है, जबकि होम्योपैथी चिकित्सकों के लिए कहीं अधिक जटिल और भिन्न प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इससे चयन में समानता और निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।

अनुभव और स्थानीयता को मिले उचित महत्व—मांग

आयुष चिकित्सकों का कहना है कि—

  • पंजीकरण और आवासीय प्रमाण-पत्र से जुड़े नियमों में स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएं
  • स्थानीय निवासियों और लंबे समय से सेवा दे रहे संविदा चिकित्सकों को प्राथमिकता मिले
  • अनुभव आधारित अंक निर्धारण को अन्य चिकित्सा संवर्गों के अनुरूप बनाया जाए

उनका मानना है कि यदि इन बिंदुओं पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो न केवल नियुक्ति प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और संतुलित बनेगी, बल्कि इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। चिकित्सकों ने संबंधित प्राधिकारों से अपील की है कि वे चयन प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा कर आवश्यक सुधार करें, ताकि योग्य और अनुभवी आयुष चिकित्सकों के साथ न्याय सुनिश्चित हो सके।

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