Saturday, February 14, 2026
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झारखंड बंद से पहले रांची में विशाल मशाल जुलूस, आदिवासी संगठनों का सरकार को कड़ा संदेश

खूंटी के पहड़ा राजा सोमा मुंडा की हत्या और झारखंड में बढ़ते अपराध के विरोध में आदिवासी संगठनों का संयुक्त प्रदर्शन

Highlights

  • जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्टा चौक तक मशाल जुलूस
  • अनेक आदिवासी संगठनों की संयुक्त भागीदारी
  • पूर्व मंत्री गीता श्री उरांव समेत कई अगुआ उपस्थित
  • सोमा मुंडा हत्या कांड और अपराध वृद्धि के खिलाफ 17 जनवरी झारखंड बंद
  • सुभास मुंडा की पत्नी ने भावुक अपील की—“न्याय के लिए बंद को सफल बनाएं”

विस्तार

राजधानी रांची में बुधवार की शाम एक ऐतिहासिक दृश्‍य देखने को मिला, जब विभिन्न आदिवासी संगठनों ने संयुक्त रूप से एक विशाल मशाल जुलूस निकाला। यह जुलूस जयपाल सिंह मुंडा एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम से शुरू होकर अल्बर्टा चौक तक निकाला गया। मशालें, ढोल-नगाड़े और आदिवासी नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। माहौल पूरी तरह संघर्षपूर्ण, भावनात्मक और एकजुटता का प्रतीक था।

झारखंड बंद का ऐलान, सोमा मुंडा हत्या का विरोध

आदिवासी संगठनों ने घोषणा की है कि “पहड़ा राजा सोमा मुंडा की हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, आदिवासी अस्मिता पर हमला है।” संगठनों ने कहा कि झारखंड में अपराध बढ़ रहा है, और प्रशासन अपराधियों को रोकने में विफल है। इसी विरोध के तहत 17 जनवरी को झारखंड बंद का आवाहन किया गया है।

पूर्व मंत्री गीता श्री उरांव की मौजूदगी

पूर्व मंत्री और आदिवासी महिला नेत्री गीता श्री उरांव ने जुलूस में शामिल होकर सरकार को कड़ी चेतावनी दी। “आदिवासी समाज अपनी अस्मिता, जमीन और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। सोमा मुंडा की हत्या ने पूरे समाज को हिला दिया है। बंद में भारी जन समर्थन होगा।”

सुभास मुंडा की पत्नी की भावुक अपील

मशाल जुलूस में दिवंगत सुभास मुंडा की धर्मपत्नी भी शामिल रहीं।  उन्होंने आंखों में आंसू लिए लोगों से झारखंड बंद का समर्थन करने की अपील की। “हम न्याय चाहते हैं। अपराधियों को सजा मिले, इसलिए यह लड़ाई हर आदिवासी की है। बंद में सभी लोग साथ दें।”

प्रेम साही मुंडा का बयान

“आज का जुलूस यह बताने के लिए काफी है कि आदिवासी समाज जाग चुका है। अब अन्याय नहीं सहेंगे।”

जुलूस में भारी भीड़, प्रशासन सतर्क

जुलूस में आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि, महिला समूह, छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय ग्राम प्रधान बड़ी संख्या में शामिल थे। पूरे मार्ग पर सुरक्षा के मद्देनज़र पुलिस बल तैनात रहा, जबकि रूट पर भारी भीड़ देखने को मिली। जुलूस के दौरान लोगों में उत्साह और एकजुटता साफ झलक रही थी।

जुलूस ने साफ कर दिया कि—

सोमा मुंडा की हत्या का प्रभाव झारखंडभर में है
आदिवासी संगठन पूरी ताकत से सड़क पर उतर चुके हैं
झारखंड बंद व्यापक असर डाल सकता है

 

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