Saturday, February 14, 2026
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JPSC-2 घोटाले में बड़ा एक्शन: ED ने दर्ज की ECIR, JPSC के पूर्व अध्यक्ष–सदस्य, अफसर बन चुके 28 उम्मीदवार सहित 60 लोग मनी लाउंड्रिंग के आरोपी

CBI चार्जशीट के बाद ED की एंट्री—JPSC-2 परीक्षा में मनचाहे उम्मीदवारों को पास कराने के खेल की होगी मनी लाउंड्रिंग एंगल से जांच

Highlights

  • JPSC-2 घोटाले में ED ने ECIR दर्ज की, 60 लोग हुए अभियुक्त
  • JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप प्रसाद और 5 अन्य अधिकारी आरोपी
  • 28 ऐसे उम्मीदवार शामिल—जो अब ADM, DSP, IPS और विभिन्न सेवाओं में प्रोन्नत
  • 25 परीक्षक भी आरोपी—जिन्होंने लिखित और इंटरव्यू में नंबर बढ़ाए
  • CBI ने 12 साल बाद 2024 में आरोपपत्र दायर किया था
  • मनी लाउंड्रिंग के जरिए परीक्षा में पास कराने का आरोप

विस्तार

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित दूसरी सिविल सेवा परीक्षा में हुई भारी गड़बड़ी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाया है। ED ने मनी लाउंड्रिंग की जांच के लिए ECIR दर्ज करते हुए CBI द्वारा आरोपित सभी 60 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया है। यह मामला अब सिर्फ परीक्षा गड़बड़ी नहीं, बल्कि “आर्थिक अपराध” और प्रणाली को भ्रष्ट करने की साजिश के रूप में जांचा जाएगा।

ED की जांच क्यों?

ECIR में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि अयोग्य उम्मीदवारों को मनी लाउंड्रिंग के जरिए सफल घोषित कराया गया और लिखित परीक्षा तथा इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने के बदले पैसे का सीधा लेन-देन हुआ। जांच में यह भी सामने आया है कि प्रभावशाली लोगों के नज़दीकी उम्मीदवारों को फर्जी तरीके से पास कराया गया, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया संदिग्ध हो गई। ईडी ने इस मामले में बड़े षड्यंत्र की संभावना जताते हुए संकेत दिया है कि इसमें कई स्तरों पर मिलीभगत और व्यवस्थित तरीके से की गई हेराफेरी शामिल हो सकती है।

इन 60 लोगों को बनाया अभियुक्त

1️) JPSC के तत्कालीन अधिकारी (6 लोग)

  1. दिलीप कुमार प्रसाद (पूर्व अध्यक्ष) 
  2. गोपाल प्रसाद (सदस्य) 
  3. शांति देवी (सदस्य) 
  4. राधा गोविंद नागेश (सदस्य) 
  5. एलिस उषा रानी सिंह (परीक्षा नियंत्रक) 
  6. अरविंद कुमार सिंह (असिस्टेंट कोऑर्डिनेट इवैलुएशन)

2️) ग्लोबर इन्फॉरमेटिक्स के मैनेजर

  • धीरज कुमार (ओएमआर शीट प्रोसेसिंग में भूमिका)

3️) गलत तरीके से अफसर बने 28 उम्मीदवार

इनमें शामिल—
✔ ADM रैंक के अफसर
✔ DSP और IPS में प्रोन्नत पुलिस अधिकारी
✔ राज्य प्रशासनिक सेवा / वित्त सेवा अधिकारी

4️) 25 परीक्षक

ED ने इन परीक्षकों को आरोपी बनाया है क्योंकि—
➡ इन लोगों ने लिखित परीक्षा में नंबर बदले
➡ इंटरव्यू में फर्जी बढ़त दिलाई
➡ बाहरी दबाव में मनचाही मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई

 

मामला कैसे बढ़ा?

✔ सरकार ने पहले ACB जांच बैठाई

स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

✔ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

ACB की धीमी जांच से अदालत नाराज़।

✔ हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया

CBI ने 2012 में FIR (प्राथमिकी) दर्ज की।

✔ 12 साल बाद 2024 में CBI ने अदालत में चार्जशीट दायर की

मुख्य आरोप—
➡ फर्जी तरीके से नंबर देना
➡ सिस्टमेटिक करप्शन
➡ अफसर बनाने में “गोटाला सिंडिकेट” सक्रिय

✔ अब ED की एंट्री

ED अब इस पूरे सिस्टम में धन-शोधन (Money Laundering) के एंगल से जांच करेगी।

अब क्या होगा?

सभी 60 अभियुक्तों से पूछताछ का सिलसिला जारी है, जिससे कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना बढ़ गई है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर गलत तरीके से अफसर बने लोगों को सेवा से हटाया जा सकता है, जबकि ED उनकी अवैध संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर सकती है। इस पूरे मामले में शामिल सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है, ताकि जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। लगातार सामने आ रहे खुलासों ने परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है, जिससे पूरे चयन तंत्र पर भरोसा गहराने के बजाय और अधिक संदेह उत्पन्न हो रहा है।

JPSC-2: झारखंड का सबसे बड़ा परीक्षा घोटाला क्यों कहा जाता है?

अयोग्य लोगों को अफसर बनाए जाने का यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक ईमानदारी पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि मेहनत से पढ़ने वाले उन युवाओं के सपनों को भी कुचल देता है जो अपने दम पर सफलता पाना चाहते थे। जांच के दौरान सिस्टम में गहरी पैठ बना चुके एक संगठित रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसने नियमों और मेरिट दोनों को धत्ता बताते हुए पूरे चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया। इस पूरे प्रकरण ने राज्य की सिविल सेवा की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है और साफ कर दिया है कि व्यवस्था के भीतर कई कड़ियों की गहन समीक्षा अब बेहद जरूरी हो गई है।

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