संगठन को ‘थोपने’ के आरोपों से बाहर निकलने की कोशिश, कांग्रेस अब नीचे से ऊपर तक हर स्तर पर प्रतिभाशाली प्रवक्ताओं की तलाश में जुटी
Highlights :
- प्रवक्ता चयन के लिए कांग्रेस ने शुरू की लोकतांत्रिक प्रक्रिया
- गूगल फॉर्म के माध्यम से 5 दिसंबर तक प्रतिभा प्रदर्शन का अवसर
- क्षेत्रीय भाषाओं में मजबूत टीम तैयार करने पर जोर
- बिहार चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के बाद खुद को पुनर्गठित करने की कोशिश
- संगठनिक निर्णयों में कार्यकर्ताओं की राय को प्राथमिकता
विस्तार
कांग्रेस अब बदलेगी प्रवक्ता चयन की प्रक्रिया
लंबे समय से संगठन पर “थोपने की राजनीति”, “गणेश परिक्रमा” और “गगन बिहारी नेताओं” को तरजीह देने जैसे आरोप झेलती आ रही कांग्रेस अब खुद को बदलने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। पार्टी ने संगठन निर्माण तथा प्रत्याशी चयन को लेकर पूरी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू की है ताकि लोकप्रिय, सक्षम और जमीनी कार्यकर्ताओं को नेतृत्व में स्थान दिया जा सके।
जमीनी स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक ‘प्रतिभा की खोज’
कांग्रेस अब नए और काबिल प्रवक्ताओं की खोज में पूरे देश में अभियान चला रही है। पार्टी ऐसे लोगों को प्रवक्ता बनाना चाहती है जो—
- पार्टी की विचारधारा समझते हों
- बौद्धिक क्षमता रखते हों
- नीतियों को स्पष्ट रूप से जनता तक पहुंचा सकें
- पार्टी के प्रति निष्ठावान हों
इसके लिए जरूरी नहीं कि उम्मीदवार कोई स्थापित नेता ही हो। गांव, ब्लॉक, जिला या राज्य स्तर पर सक्रिय कोई भी सक्षम कार्यकर्ता प्रवक्ता की भूमिका निभा सकता है — बस योग्यता और समझ होनी चाहिए।
गूगल फॉर्म के माध्यम से आवेदन : 5 दिसंबर तक मौका
पार्टी ने अपने अभियान को हाईटेक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए गूगल फॉर्म जारी किया है। युवा कार्यकर्ता, नेताओं और इच्छुक लोगों को 5 दिसंबर तक अपना प्रोफाइल और प्रतिभा प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
क्षेत्रीय भाषाओं में मजबूत उपस्थिति बनाने का लक्ष्य
कांग्रेस ने महसूस किया है कि भाषाई विविधता वाले देश में सिर्फ हिंदी या अंग्रेज़ी से आम जनता तक संदेश पहुंचना मुश्किल है। इसलिए पार्टी अब—
- स्थानीय भाषाओं के प्रवक्ता तैयार करेगी
- क्षेत्रीय मीडिया में मजबूत पकड़ बनाएगी
- लोगों से उनकी भाषा में संवाद करेगी
कांग्रेस का मानना है कि इसी रास्ते जनता से सीधा जुड़ाव मजबूत होगा।
बिहार चुनाव से मिली सीख, अब सुधार की तैयारी
हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। एक समय राष्ट्रीय राजनीति की धुरी रही पार्टी आज कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों के पीछे खड़ी दिखती है।
कांग्रेस नेतृत्व ने माना कि—
- जनता तक अपनी बात सही भाषा और तरीके से नहीं पहुंचा पाई
- प्रवक्ताओं और संचार प्रणाली की कमी साफ दिखाई दी
अब पार्टी इस कमजोरी को दूर करके नया ढांचा खड़ा कर रही है।
