Sunday, November 30, 2025
Homeखबर स्तम्भझारखंड हाई कोर्ट ने टीजीटी नियुक्ति से जुड़े सभी 363 मामले निपटाए,...

झारखंड हाई कोर्ट ने टीजीटी नियुक्ति से जुड़े सभी 363 मामले निपटाए, मीना कुमारी फैसले के आधार पर सुनवाई समाप्त

जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने एक जैसे मुद्दों वाले सभी मामलों का एक साथ निस्तारण किया — भविष्य की अपील के निर्णय स्वतः लागू होंगे

Highlights:

  • झारखंड हाई कोर्ट ने टीजीटी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े 363 लंबित मामलों का एक साथ निपटारा किया
  • अदालत ने माना कि सभी याचिकाओं में कानूनी और तथ्यात्मक मुद्दे समान हैं
  • सभी मामलों को मीना कुमारी केस के निर्णय के आधार पर निस्तारित किया गया
  • भविष्य में इस केस पर आने वाला कोई भी आदेश इन सभी 363 मामलों पर स्वतः लागू होगा
  • विभिन्न याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं में चंचल जैन, अजय कुमार पाठक, तेजस्विता सफलता, शुभम मिश्रा, अमृतांश वत्स समेत कई वकील शामिल

विस्तार:

समान मुद्दों पर आधारित सभी याचिकाओं का एक साथ निष्पादन

रांची-  झारखंड हाई कोर्ट ने टीजीटी (ट्रेंड ग्रैजुएट टीचर) नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित सभी 363 लंबित याचिकाओं का गुरुवार को एक साथ निपटारा कर दिया। जस्टिस आनंदा सेन की एकल पीठ ने कहा कि सभी मामलों में उठाए गए प्रश्न और तथ्य समान प्रकृति के हैं, इसलिए इनका निस्तारण मीना कुमारी बनाम झारखंड कर्मचारी चयन आयोग प्रकरण में दिए गए फैसले के अनुरूप किया जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं के वकील रहे मौजूद

इन 363 याचिकाओं में शामिल पक्षकारों की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन, अजय कुमार पाठक, तेजस्विता सफलता, शुभम मिश्रा, अमृतांश वत्स, अभिजीत इंद्र गुरु समेत कई अधिवक्ताओं द्वारा दायर मामले भी शामिल थे। कोर्ट ने आज सभी मामलों का निष्कर्ष एक ही आधार पर निकालते हुए अंतिम रूप से निपटारा कर दिया।

आगे आने वाले निर्णय से भी जुड़े रहेंगे ये सभी मामले

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि मीना कुमारी वाले मामले में आगे उच्च अदालत द्वारा कोई नया आदेश पारित होता है, तो उसका प्रभाव स्वतः इन सभी 363 मामलों पर लागू होगा।

टीजीटी अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला

टीजीटी नियुक्ति का मुद्दा लंबे समय से अदालत में लंबित था। हाई कोर्ट द्वारा एक साथ सभी मामलों का निस्तारण किए जाने के बाद अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी है कि भर्ती प्रक्रिया में अब आगे की कानूनी बाधाएं धीरे-धीरे दूर होंगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न्यायिक एकरूपता और स्थिरता को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

RELATED ARTICLES

Most Popular