Sunday, November 30, 2025
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धनतेरस 2025: आरोग्य, समृद्धि और दिव्यता का पर्व, जानें भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य की कथा और शुभ मुहूर्त

कार्तिक मास की त्रयोदशी को मनाया जाता है धनतेरस का पर्व, भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य और दीपदान का है विशेष महत्व

Highlights:

  • धनतेरस से होती है पांच दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत
  • भगवान धन्वंतरि के जन्म का दिन — आयुर्वेद और आरोग्य के देवता
  • समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे धन्वंतरि
  • इस बार धनतेरस 18 अक्टूबर को मनाई जा रही है
  • शुभ मुहूर्त: शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक पूजन का श्रेष्ठ समय

विस्तार

सनातन धर्म में दीपावली पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। यह दिन केवल धन-संपत्ति की प्राप्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि आरोग्य, दीर्घायु और समृद्धि का संदेश देता है। धार्मिक रूप से यह दिन धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अंशावतार और देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है।

धार्मिक महत्व

भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद का जनक माना जाता है।
शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।संध्या के समय दीपदान का विशेष महत्व होता है — माना जाता है कि प्रदोषकाल में घर के बाहर दीप जलाने से यम का भय दूर होता है और जीवन में दीर्घायु का वरदान मिलता है।

समुद्र मंथन और भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य

पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवराज इंद्र के अहंकार से महर्षि दुर्वासा ने उन्हें श्राप दिया, तो तीनों लोक श्रीहीन हो गए। संकट से मुक्ति के लिए देवताओं ने भगवान शिव की सलाह पर समुद्र मंथन किया। मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकी नाग को रस्सी बनाकर मंथन से चौदह रत्न प्राप्त हुए। इन्हीं में से चौदहवें रत्न के रूप में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। भगवान विष्णु ने उन्हें देवताओं का वैद्य नियुक्त किया और उन्होंने औषधियों की शक्ति को जगाया, जिससे वनस्पतियों में रोगनाशक तत्वों का संचार हुआ।

धनतेरस से जुड़ी दिव्य घटनाएं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार

  • शरद पूर्णिमा को चंद्रमा का प्राकट्य,
  • कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय,
  • त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि,
  • और अमावस्या को देवी लक्ष्मी प्रकट हुईं। इसी कारण कार्तिक त्रयोदशी का यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

कौन हैं भगवान धन्वंतरि?

भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य और चिकित्सा के देवता कहा जाता है। उनकी चार भुजाएं हैं, एक हाथ में शंख, एक में चक्र, एक में अमृत कलश, और एक में औषधि।
उनका स्वरूप भगवान विष्णु से मिलता-जुलता माना जाता है।

धनतेरस 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त

  • तिथि प्रारंभ: 18 अक्टूबर 2025, दोपहर 12:18 बजे
  • तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर 2025, दोपहर 1:51 बजे
  • पूजन मुहूर्त: शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक

खरीदारी के प्रमुख मुहूर्त:

1️दोपहर 12:01 से 12:48 बजे तक
2 दोपहर 1:51 से 3:18 बजे तक
3️ शाम 6:11 से रात 8:41 बजे तक

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