Wednesday, April 29, 2026
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समाज की परंपरा अमन चैन व शांति तथा अच्छी पैदावार को लेकर किया गया वीर पूजा, हजारों वर्षों पुरानी पूर्वजों की धरोहर है वीर पूजा

गिद्धौर:-प्रखंड के सलगा गांव में शुक्रवार को वीर पूजा  किया गया। यह पूजा गांव के भगत रविन्द्र भुईयां के द्वारा संपन्न किया गया। जहां गांव समाज के सभी स्वजाति के लोगों ने सहयोग किया। पूजा करने का यह पारंपरिक रिवाज हजारों वर्षों से चलती आ रही है। पुजारी ने बतलाया कि गांव की सुख चैन शांति के लिए यह पूजा बैसाख माह में किया जाता है। लेकिन इस वर्ष गांव में प्राकृतिक परेशानी के वजह से आषाढ़ माह में किया गया। गांव में शांति के लिए यह पूजा किया जाता है। 

पूजा में भगत के साथ-साथ भुईयां समाज के लोगों ने घर-घर घूम कर ढोल बजाया।बताया जाता है कि इससे गांव के ग्रामीणों को जागते हैं। इस समय में मिलने वाला अनाज, सब्जी, फल की उगाही कर बीरबन के पास जमा कर पूजा विधि विधान से पाहन के द्वारा संपन्न किया जाता है। यह पूजा साल में एक बार किया जाता है। मोर पंख से पाहन घर-घर घूम कर बच्चों को झाड़ते हैं।तथा इस कार्य से गांव में बुरी नजरों से बचने का भी रिवाज कहा गया है। 

वीर पूजा करने से गांव में पालतू जानवरों को भी सुख चैन प्राप्त होता हैं। तथा लोगों का कल्याण होता है। वीर पूजा करने से ग्रामीणों का मानना है।कि अच्छी बारिश का भी अनुमान अरवा चावल देखकर पाहन करता है। वीर पूजा प्रखंड के लगभग गांव में जहां जनजाति निवास करते हैं। सभी जगह किया जाता है। इस पूजन में जनजाति समाज तथा पाहन के द्वारा वीर पूजा में करीबन आधा दर्जन मुर्गे एवं एक जोड़े सूअर की भी बली दी जाती है। यह पूजा गांव में स्थित बरगद पेड़ में बीरबन देवता का पूजन कर खैर के खूंटी गाड़ने का भी पारंपरिक रिवाज है। पूजा संपन्न होने के बाद घी एवं लाल सिंदूर से संपूर्ण भूइयां समाज टीका लगाते हैं। और 1 साल सुख शांति से रहने का प्रार्थना करते हैं।बीरबन पूजा में भाग लेने वाले तथा सहयोगी गांव से संजय भुईयां रमेश भुईयां भरत भुईयां केला भुईयां राजेंद्र भुईयां मनोज भुईयां मुकेश भुईयां एवं महिलाएं भी उपस्थिति रहती हैं।

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